यज्ञस्थल पर नारियल विस्फोट,मंडप जल कर हुआ राख

यज्ञस्थल पर नारियल विस्फोट, पूरा मंडप जल कर हुआ राख

बिहाटा में सात दिनों से चल रहे यज्ञ के दौरान हवन कुंड में अचानक नारियल विस्फोट हो गया जिससे पूरा मंडप जल कर राख हो गया.

इष्ट देव को खुश करने के लिए पूजा में नारियल फोड़ने की परम्मपरा है. लेकिन किसी ने नारियल नहीं फोड़ा और वह हवन कुंड में जा गिरा. इस कारण नारियल ब्लास्ट कर गया और देखते ही देखते पूरे पंडाल में आग पसर गयी. और परिणाम यह हुआ कि पूरा पंडाल देखते ही देखते जल गया.

इस घटना में किसी की शारीरिक क्षति तो नहीं हुई लेकिन स्थानीय लोग इसके कई अर्थ निकाल रहे हैं. कुछ लोग इसे इष्ट देव की नाराजगी का परिणाम बता रहे हैं.

जानकारी मिलते ही आग पर काबू पाने के लिए दमकल की गाडी पहुंची और आग पर काबू पाया गया.

बिहटा के विष्णपुरा के बगीचा में सात दिवसीय यज्ञ महोत्सव चल रहा था. यज्ञ का उल्लास अचानक हड़कंप में तब्दील हो गया. उस समय अफरा-तफरी मच गयी जब हवनकुंड में नारियल बलास्ट हो गया. आग देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर गया. यज्ञ स्थल का मंडप धू धू कर जलने लगा और देखते ही देखते पूरा मंडप जलकर खाक हो गया.

आग लगने की जानकारी अग्निशमन कार्यालय और बिहटा थाना को दी लेकिन जबतक प्रशासन के तरफ से कोई बचाव कार्य किया जाता तबतक पूरा पंडाल जलकर खाक हो चुका था. ग्रामीणों ने भी आग पर काबू पाने के लिए भरपूर कोशिश की लेकिन आग ने इतना विकराल रुप धारण कर लिया था कि लोगों की मेहनत बेकार गयी.

अगलगी की इस घटना को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है. कुछ लोग इसे धार्मिक एंगल से जोड़कर भी देख रहे हैं.

पूजा में क्यों फोड़ते हैं नारियल

याद रहे कि धार्मिक आस्था के अनुसार पूजा में नारियल तोड़ने का अर्थ है कि व्यक्ति ने अपने इष्ट देव को खुद को समर्पित कर दिया इसलिए पूजा में भगवान के सामने नारियल फोड़ा जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ऋषि विश्वामित्र इंद्र से नाराज हो गए और दूसरा स्वर्ग बनाने की रचना करना लगे. लेकिन वो दूसरे स्वर्ग की रचना से स्तुंष्ट नहीं थे. इसके बाद उन्होंने दूसरी सृष्टि के निर्माण में मानव के रूप में नारियल का प्रयोग किया था. इसलिए उस पर दो आंखें और एक मुख की रचना होती है. पहले के समय में बलि देने का प्रथा बहुत अधिक थी. उस समय में मनुष्य और जानवरों की बलि देना समान बात थी. तभी इस परंपरा को तोड़ने के लिए नारियल चढ़ाने की प्रथा शुरू हुई.

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