घुटना-कूल्हा प्रत्यारोपण के बाद सामान्य जिंदगी : डॉ. शर्जील

घुटना-कूल्हा प्रत्यारोपण के बाद सामान्य जिंदगी : डॉ. शर्जील

सफदरगंज अस्पताल, फोर्टिस सहित देश-विदेश में मरीजों को नया जीवन दे चुके डॉ. शर्जील रशीद बता रहे हैं घुटने, कूल्हे की अनेक परेशानियों का इलाज।

डॉ. शर्जील रशीद

परिचय: डॉ. शर्जील रशीद जोड़ प्रत्यारोपण एवं आर्थोस्कोपिक सर्जन है। इन्होंने बीएन मंडल विश्वविद्यालय से एमबीबीएस किया है। उसके बाद मणिपाल विश्वविद्यालय से एमएस(आर्थोपेडिक्स) किया है। नई दिल्ली में जोड़ प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। सफदरगंज अस्पताल (नई दिल्ली) के स्पोर्ट्स इंज्युरी सेंटर से स्पोर्ट्स इंज्युरी के इलाज का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद दिल्ली सरकार और फोर्टिस अस्पताल में सेवा दी। नई दिल्ली के रॉकलैंड अस्पताल और केन्या के मेडिहील अस्पताल में कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर चुके हैं। पटना के उदयन हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट रह चुके हैं और मेडाज हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट के रूप में सेवा दे रहे हैं। 11 वर्ष से ज्यादा के कॅरियर में 500 से ज्यादा घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण कर चुके हैँ। इसी तरह 500 से ज्यादा घुटने और कंधे की दूरबीन विधि से सर्जरी (ऑर्थरोस्कॉपी) एवं 5000 से ज्यादा ट्रॉमा सर्जरी कर लोगों को स्वस्थ कर चुके हैं। इनकी विशेषता छोटे चीरे से सर्जरी करना है। ये आलमगंज में ‘पाटलिपुत्रा ऑर्थो सेंटर’ क्लीनिक चलाते हैं।

प्रश्न: लोगों में घुटना या कूल्हा प्रत्यारोपण को लेकर काफी कंफ्यूजन हैं। क्या है वस्तु स्थिति?
उत्तर: निश्चित रूप से इसको लेकर काफी भ्रम है। लोग समस्या में होते हैं, फिर भी नजरअंदाज करते हैं। लोग कहते हैं कि घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण सफल नहीं होता है। मरीज को हमें काफी समझाना पड़ता है। घुटना या कूल्हा प्रत्यारोपण पूर्णत: सफल है। इसलिए यदि समस्या है और डॉक्टर घुटना या कूल्हा का रिप्लेसमेंट करने के लिए कह रहे हैं तो कराना चाहिए।

प्रश्न: ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या होता है?
उत्तर: यह एक प्रकार का गठिया है। यह उम्र से संबंधित समस्या है ना की कोई बीमारी। घुटना घिसने को ऑस्टियोआर्थराइटिस बोलते हैं। अमूमन 60 वर्ष के बाद यह समस्या होती है।

प्रश्न: ऑस्टियोआर्थराइटिस के क्या लक्षण होता है?
उत्तर: शुरुआत में सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत होना, भारतीय तरीके से शौच करने में समस्या होना आदि। समस्या थोड़ी बढ़ने पर घुटना से आवाज आने लगती है। चलने में दर्द होने लगता है। पैर टेड़ा होने लगता है। सूजन भी आ जाता है। बाद वाले स्टेज में सोने, मोड़ने और छूने पर भी घुटना दर्द करना।

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प्रश्न: क्या इसका इलाज संभव है?
उत्तर: बिल्कुल इलाज संभव है। शुरुआती स्टेज में दवा और फिजियोथेरेपी से समस्या को नियंत्रित किया जाता है। बीच वाले स्टेज में इलाज करने पर थोड़ा दर्द रहता है, लेकिन काम कर सकते हैं। यदि 100 प्रतिशत आराम चाहते हैं तो पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण(टोटल नी रिप्लेसमेंट) ही उपाय है।

प्रश्न: इलाज के क्या-क्या विकल्प मौजूद है?
उत्तर: इसके तीन वर्ग में रखा जा सकता है। पहला, फिजियोथेरेपी और दवा; दूसरा, जीवन चर्या में बदलाव(जमीन पर उठ बैठ नहीं करना, दौड़ना नहीं, सीढ़ी पर कम चढ़ना और साइकलिंग नहीं करना) और तीसरा, सर्जरी। सर्जरी में भी दो विकल्प हैं; पहला, आंशिक घुटना प्रत्यारोपण(यह समस्या के शुरुआत में ही होता है।) और दूसरा, पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण।

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प्रश्न: पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण कराने का सही समय क्या होता है?
उत्तर: अगर दर्द इतना होता है कि थोड़ी दूर चलना पड़े तो डर लगता हो, रोज दर्द निवारक गोलियां खानी पड़े, पैर ज्यादा टेड़ा होने लगे आदि। पैर टेड़ा होने से हड्डी का क्षरण होता है। ऐसे में सर्जरी करा लेनी चाहिए।

प्रश्न: घुटना प्रत्यारोपण कितना सफल है?
उत्तर: लगभग 100 प्रतिशत यह सफल होता है। ऑपरेशन के अगले दिन से ही मरीज पूरा वजन डाल कर चलने लगता है।

प्रश्न: घुटना प्रत्यारोपण पर कितना खर्च आता है?
उत्तर। अब तो यह प्रत्यारोपण काफी सस्ता हो गया है। एक घुटना के प्रत्यारोपण में डेढ़ लाख रुपए और दोनों घुटने के प्रत्यारोपण में 2.75 लाख रुपए खर्च आता है। बिहार में दोनों घुटना का केस ज्यादा आते हंै।

प्रश्न: ऑपरेशन में कितना समय लगता है? क्या मरीज को बेहोश किया जाता है।
उत्तर:एक घुटना के ऑपरेशन में एक घंटा लगता है। यदि दोनों एक साथ हो ऑपरेशन हो तो ढ़ाई घंटा लगता है। वहीं कूल्हा के प्रत्यारोपण में एक घंटा लगता है। ऑपरेशन के लिए मरीज को बेहोश नहीं किया जाता है बल्कि कमर में इंजेक्शन लगाकर नीचले हिस्से को सून किया जाता है। फिर ऑपरेशन होता है।

प्रश्न: पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण के बाद क्या सावधानियां बरतनी होती है?
उत्तर: दौड़ना नहीं चाहिए। इसी तरह शौच के लिए भारतीय शौचालय इस्तेमाल नहीं करना होता है। बाकी सारा काम कर सकते हैं। मसलन, साइकलिंग, पालथी मारकर बैठना, योगा या नमाज पढ़ना आदि।

प्रश्न: घुटना या कूल्हा प्रत्यारोपण के लिए कोई उम्र सीमा भी है?
उत्तर: उम्र से कोई फर्क नहीं पड़ता है। सिर्फ हृदय ठीक होना चाहिए और खून की जांच सही हो तो प्रत्यारोपण हो सकता है। यह काफी सुरक्षित सर्जरी होता है। मैंने 90 वर्ष उम्र तक के लोगों का प्रत्यारोपण किया है।

प्रश्न: पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण के अलावा और कौन सी सर्जरी होती है?
उत्तर: एक सर्जरी ‘एचटीओ’ है। पैर टेड़ा होने और घुटना कम खराब होने पर यह सर्जरी की जाती है। इससे टेड़ापन ठीक हो जाता है।

प्रश्न: पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण से उबरने में कितना समय लगता है?
उत्तर: ऑपरेशन के चार-पांच दिन बाद व्यक्ति को छड़ी देकर चलाते हैं। अमूमन एक माह में मरीज बिना छड़ी के चलने लगता है।

प्रश्न: आपकी हॉबी क्या है?
उत्तर: व्यायाम करना, गाना सुनना और घूमना।

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