गुजरात भाजपा में विद्रोह, अमित शाह के होश उड़े

गुजरात भाजपा में विद्रोह, अमित शाह के होश उड़े

17 साल में पहली बार कि प्रधानमंत्री मोदी-शाह ने जो लिस्ट फाइनल की, उसे गुजराती नेताओं ने मानने से इनकार किया। निर्दल लड़ने की घोषणा। एक ने मैदान छोड़ा।

गुजरात भाजपा में 17 साल में पहली बार विद्रोह साफ दिख रहा है। छह बार विधायक रहे चुके मधु भाई श्रीवास्तव ने टिकट काटे जाने के बद निर्दलीय लड़ने की घोषणा कर दी है। दो और विधायक भी इसी राह पर हैं। भाजपा के एक नेता ने टिकट मिलने के बाद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। खबर है कि कम से कम 40 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं ने विद्रोह कर दिया है। पहले दिल्ली से एक बड़े नेता को विद्रोही नेताओं नेताओं से बात करने भेजा गया। दिल्ली के निर्देश पर भेजे गए नेता पूरी तरह विफल रहे। अब कल से गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद पार्टी मुख्यालय कमलम में जमे हैं और विद्रोही नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के गृह प्रदेश गुजरात के बारे में कहा जाता है कि जो मोदी बोलेंगे, वही सच है। वे जब चाहे मुख्यमंत्री से लेकर पूरी कैबिनेट बदल देते रहे, लेकिन पूरे गुजरात भाजपा में किसी ने चूं तक नहीं की। अब पहली बार ऐसा हो रहा है कि मोदी-शाह को अपने गृह प्रदेश में विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। हद तो यह है कि वडवान विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित हो चुके जिग्ना पांड्या ने चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है।

गुजरात में भाजपा ने 182 में 166 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इनमें 40 विधायकों के टिकट काट दिए गए हैं। साथ ही पिछली बार के प्रत्याशियों को भी बड़ी संख्या में टिकट नहीं दिया गया है। मोदी-शाह को भरोसा था कि बड़े पैमाने टिकट काटे जाने के बाद भी कोई नेता विरोध करने की हिम्मत नहीं करेगा। लेकिन पहली बार ऐसा नहीं हुआ। अब विरोध खुल कर सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी तथा डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने पत्र लिखकर टिकट नहीं दिए जाने की अपील की थी। अब उनके पत्र के बारे में कहा जा कहा है कि इसके लिए उन पर दबाव बनाया गया। ये नेता भी चुप घर पर नहीं बैठ सकते।

इससे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश की फतेहपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे कृपाल परमार को फोन कर चुनाव से हट जाने को कहा था। इसके बावजूद परमार चुनाव में डटे रहे। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शाह विद्रोहियों को मना पाएंगे। विद्रोह इतने बड़े पैमाने पर है कि सबको मनाना असंभव दिख रहा है। ऐसे में भाजपा को भारी नुकसान हो सकता है।

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