हर दल में हैं सांप्रदायिक नेता, निकलें बाहर, राहुल ने खींची लकीर

हर दल में हैं सांप्रदायिक नेता, निकलें बाहर, राहुल ने खींची लकीर

राहुल ने गेमचेंजर बयान दिया है। कहा कि कांग्रेस में भी संघी हैं, उन्हें बाहर निकालें। सवाल है क्या अन्य दलों में संघी नहीं हैं। हैं, तो उनका क्या होगा?

कुमार अनिल

राहुल गांधी ने एक ऐसा बयान दिया है, जो आज तक किसी नेता ने नहीं दिया। उन्होंने कल अपनी सोशल मीडिया टीम से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस में भी संघ की विचारधारा वाले नेता हैं। उन्होंने दो-टूक कहा कि ऐसे नेताओं के लिए बाहर जाने का दरवाजा खुला है, वे जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस से बाहर भी संघ की विचारधारा के विरोधी लोग हैं, उन्हें पार्टी में लाने की कोशिश करनी होगी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस में निडर लोगों की जरूरत है। जो डर गया, वह संघ की विचारधारा से नहीं लड़ सकता। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिधिंया और जितेंद्र प्रसाद जैसे नेता संघ से डर गए। उन्हें अपने महल और अपने धन को बचाना था, इसलिए वे भाजपा में चले गए। भाजपा-संघ सीबीआई, ईडी से डराते हैं, जो डर गया, वह भाजपा में शामिल हो जाता है।

राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले राफेल घोटाले का मुद्दा उठाते हुए चौकीदार ही चोर है का नारा दिया था, तब पार्टी कई नेताओं ने उनका समर्थन नहीं किया था। राहुल ने अंबानी का नाम लेकर कहा था कि कि वे देश को लूट रहे हैं। राफेल दलाली में शामिल हैं। इसका भी अनेक कांग्रेस नेताओं ने समर्थन नहीं किया था। अकेले राहुल ही हर सभा में ये बातें बोलते रहे थे। अब जबकि फ्रांस में जांच शुरू हो गई है, तो राहुल का स्टैंड मजबूत हुआ है।

राहुल गांधी ने जो बात अपनी पार्टी के लिए कही, वह दूसरे सभी दलों के लिए भी सत्य है। आप, सपा से लेकर जदयू और तृणमूल तक में सांप्रदायिक विचार वाले लोग मौजूद हैं। मुस्लिमों के प्रति घृणा का भाव रखते हैं। ऐसे लोग भी हैं, जिनके लिए राजनीति धन कमाने का साधन है। वे डरे हुए लोग हैं। ममता के साथ रहनेवाले सुवेंदु अधिकारी आज भाजपा में हैं, जिन्होंने चुनाव में खुलकर सांप्रदायिक कार्ड खेला।

राहुल गांधी के इस बयान का असर न सिर्फ कांग्रेस पर पड़ेगा, बल्कि देर-सबेर अन्य दलों पर भी पड़ना तय है। यूपी में जिस तरह पंचायत चुनाव में सपा नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका गया, मारपीट की गई, पर अखिलेश यादव से जो उम्मीद थी, उस तरह वे विरोध करते नहीं दिखे। उन पर भी आरोप लगता रहा है कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव संघ से डरते हैं।

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जब राहुल ने खुल कर कह दिया है, तो अब संघ के प्रति नरम रवैया रखनेवाले नेता जल्द ही कटघरे में नजर आएं, कुछ बाहर हों, तो आश्चर्य नहीं। ऐसे होते ही अन्य दलों में बी आवाज उठनी तय है। जल्द ही नेहरू की आइडिया ऑफ इंडिया सहित आधुनिक भारत और संघ के हिंदू राष्ट्र की विचारधार में संघर्ष तेज हो सकती है।

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