एडिटोरियल कमेंट

यह तो सरासर बेशर्मी और बेअदबी है!

बिहार के शिक्षा विभाग की यह बेअदबी भी है और बशर्मी भी. उसने अपने एक अधिकारी को रिटायरमेंट के दिन सम्मानित करने के बजाये उनका पद घटा दिया. बिहार राज्य पुस्तकालय एवं सूचना प्राधिकार केन्द्र के निदेशक श्याम नारायण कुंवर 31 जनवरी को रिटायर कर गये. लेकिन शिक्षा विभाग ने उन्हें रिटायरमेंट के साथ डिमोट भी कर दिया. किसी अधिकारी ...

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दीवार पर लिखी इबारतें कुछ तो कहती हैं !

हाजीपुर के दिग्घी रेलवे क्रॉसिंग पर एक हॉर्डिंग में राबड़ी देवी दोनों हाथों से आंचल फैला कर जनता से मुखातिब हैं- कह रही हैं ‘फैसला आप करें’! बैकग्राउंड में लालू प्रसाद जेल की सलाखों से जनता की तरफ उम्मीद भरी नजरों से एक टक निहार रहे हैं. इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन दिग्घी क्रॉसिंग पर सोनपुर की दो महिलायें ...

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यौन उत्पीड़न: तेजपाल बनाम ‘साहब’ का ऐंगल

इस मामले में सबके दामन दागदार हैं. चाहे वह राजनीतिक पार्टियां हों, मीडिया हो, कार्पोरेट हो या बॉलिवुड. मतलब जहां सत्ता है वहां शोषण है. यह शोषण आर्थिक भी है और शारीरिक भी. अगर मामला महिलाओं का है तो यौन उत्पीड़न भी इसमें शामिल है. इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन पर तुरूण तेजपाल की घटना ने कुछ राजनीतिक दलों ...

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पटना ब्लास्ट: चिंढ़ारने वाला मीडिया आज चुप क्यों है?

पटना ब्लास्ट पर चिंढ़ारें मारने वाले चैनल व कलम तोड़ कर लिखने वाले अखबार आज चुप हैं. पुलिस संय्यमित हैं.उन्हें शायद सममझ आ गयी कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता. इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन आप कह सकते हैं कि मैं मुगालते में हूं. और मीडिया की यह चुप्पी एक रणनीतिक चुप्पी है. क्योंकि 10 नवम्बर को लखीसराय ...

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गठन के पांच सालों में मजाक बन कर रह गयी है एनआईए

पटना ब्लास्ट के बाद मेहर आलम का एनआईए के चंगुल से भागने-मिलने का खेल जितना हास्यस्पद है खुद एनआईए भी उतनी ही हास्स्पद हो के रह गयी है. इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन भारत सरकार ने आतंकवादी गतिविधियों की गुत्थी सुलझाने के तहत एक विशेष अधिनियम एनआईए एक्ट 2008 के तहत इस जांच एजेंसी का गठन किया था. 2009 ...

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पीसीआई रिपोर्ट: खतरे में है बिहार की पत्रकारिता

भारतीय प्रेस परिषद की जांच टीम ने बिहार में पत्रकारिता की आजादी पर अपनी जांच रिपोर्ट दे दी है.रिपोर्ट में नीतीश सरकार की तुलना इमर्जेंसी से की गई है और कहा गया है कि बिहार में निष्पक्षक पत्रकारिता करना असंभव है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञापन के लोभ में मीडिया संस्थानों को राज्य सरकार ने बुरी तरह अपने ...

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“बंदूक उठाओ, गोली चालओ”

अगर आपको कोई कहे कि अपनी बंदूक उठाइए और चौक चौराहे पर महिलाओं को छेड़ने वाले पर इसका इस्तेमाल कीजिए, तो आप ऐसा करेंगे? यह मश्वरा कोई मुहल्ले के ताऊ का नहीं है, बल्कि दिल्ली के उपराज्यपाल तजेंद्र खन्ना का है. सवाल है कि इतने बड़े पद वाला व्यक्ति इस तरह का मश्वरा दे तो इसे क्या कहेंगे? पर तेजेंद्र ...

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“थाना प्रभारी व एसपी को ही जानता हूं,आईजी, डीआईजी तो कागजी हैं”

झारखंड के डीजीपी कहते हैं कि एडीजी,आईजी और डीआईजी जैसे पद कागजी हैं तो भले ही पुलिस अधिकारियों को ये अपमानजनक लगे पर डीजीपी ने मैनुअल का हवाला देकर हड़कंप मचा दिया है. झारखंड के डीजीपी जीएस रथ ने पिछले दिनों ये बातें आईजी और डीआईजी की बैठक में कही थी. इतना सुनना था कि इन पदाधिकारियों को अपने पद ...

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मधुबनी कांड नौकरशाही की चूक का नतीजा

दो नौकरशाहों के कारण मधुबनी धू धू कर जलती रही और अपने बॉस के हुक्म की तामील करने के चक्कर में एसपी ने छात्रों पर गोलियां चलवाई और लाशें गिरीं. इधर मुख्यमंत्री ने भी इस मामले को प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा है कि अंत भला तो सब भला. प्रशांत की हत्या की बात सामने आई थी. . मधुबनी के ...

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मधुबनी जल उठा कौन है जिम्मेदार- जनता या नौकरशाही?

इर्शादुल हक मां ने पैर, नाखुन कपड़े से बेटे को पहचान लिया पर मधुबनी पुलिस ने मां के ममतत्व को झुठला दिया वह भी एक अधीकारी को बचाने के लिए फिर मधुबनी जल उठा. कौन है जिम्मेदार- जनता या नौकरशाही? वह दुनिया की कौन मां होगी जो अपने जिगर के टुकरे को नहीं पहचान सके. माना की प्रशांत का सर ...

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