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फ़िलिपींस की अगाथा क्रिस्टी को महात्मा सुशील कुमार माँ विजया प्रोत्साहन पुरस्कार 

फ़िलिपींस की अगाथा क्रिस्टी को महात्मा सुशील कुमार माँ विजया प्रोत्साहन पुरस्कार  इस्सयोग का दो दिवसीय महानिर्वाण महोत्सव संपन्न  हुआ हवन यज्ञ, अखंड–साधना एवं संकीर्तन , जगत कल्याण के लिए बनाई गई ‘मानव–ऋंखला‘ अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्त्वावधान में आयोजित, सूक्ष्म आध्यात्मिक साधना पद्धति‘इस्सयोग‘ के प्रवर्त्तक और अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के संस्थापक ब्रह्मलीन सद्ग़ुरु महात्मा सुशील कुमार का दो दिवसीय १७वाँ महानिर्वाण महोत्सव,बुधवार की संध्या कंकड़बाग ...

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‘शताब्दी-सम्मान’से विभूषित किए जाएँगे देश के १०० विद्वान

‘शताब्दी–सम्मान‘से विभूषित किए जाएँगे देश के १०० विद्वान साहित्य सम्मेलन में ९जून कोभव्य रूप में आयोजित होगा सम्मान समारोह  अंडमान से कश्मीर तक के विद्वानों का पटना में लगेगा महाकुंभ,आयोजित होगा राष्ट्रीय कवि–सम्मेलन पटना,२२ अप्रैल। आगामी ९ जून को, बिहार की गौरवशाली साहित्यिक संस्था बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, देश के चुने हुए हिंदी–सेवी विद्वानों को, ‘साहित्य सम्मेलन शताब्दी–सम्मान‘से विभूषित किया जाएगा। ...

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महात्मा सुशील का महापरिनिर्वाण मोहत्सव: 5 हजार इस्सयोगी हो रहे हैं शामिल

दुनिया भर से ५ हज़ार से अधिक इस्सयोगी लेंगे भाग, तैयारियाँ पूरी जगत कल्याण के लिए की जाएगी ‘ब्रह्माण्ड-साधना’, बनाई जाएगी मानव-ऋंखला सूक्ष्म आध्यात्मिक साधना पद्धति‘इस्सयोग‘ के प्रवर्त्तक और अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के संस्थापक ब्रह्मलीन संत महात्मा सुशील कुमार का १७वाँ महानिर्वाण महोत्सव पटना के गोलारोड स्थित एम एस एम बी भवन में २३–२४ अप्रैल को मनाया जाएगा। इस महोत्सव में भाग ...

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जानिए अफो या माफ कर देने का इस्लामी सिद्धांत क्या है

जानिए अफो या माफ कर देने का इस्लामी सिद्धांत क्या है अफो अरबी भाषा एक शब्द है जिसका अर्थ है क्षमा करना बक्श देना दर गुजर कर ना बदला ना लेना और गुनाह पर पर्दा डालना.     शरीयत के इस्तेमाल में अफो से मुराद किसी की निजी बुराई पर बदला लेने की ताकत के बावजूद बदला ना लेना और ...

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बिहार में कंपनियों के विकास के लिए पब्लिक रिलेशन समय की बड़ी मांग

पटना, 17 अप्रैल 2019 : संचार क्रांति आज के आधुनिक युग की सबसे बड़ी जरूरत है। यूं तो पहले भी इसकी जरूरत रही थी तभी तो संचार क्रांति नाम दिया गया, लेकिन अस्सी और नब्बे के दशक मे भारत में इसने जोर पकड़ना शुरू किया। आज की गला काट प्रतियोगिता के समय में इसकी मांग अधिक बढ़ गयी है। पहले ...

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नेहरू की आत्मा ने मोदी को परेशान क्यों कर रखा है

नेहरू की आत्मा ने मोदी को परेशान क्यों कर रखा है मोदी के नेतृत्व में भाजपा तथ्यों को झुठलाने की बेशर्मी कोशिश कर रही है.आर्यों को देश बंटवारा व सुरक्षा परिषद में चीन की स्थाई सदस्यता के लिए नेहरू को जिम्मेदार ठहराना उसी का हिस्सा है. -राम पुनियानी     भाजपा ने हाल में लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र ...

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गिरिजा बरणबाल की जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवयित्री-सम्मेलन

गिरिजा बरणबाल की जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवयित्री–सम्मेलन पटना,१२ अप्रैल। आज बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का भव्य सभागार,गए शाम तक कोमल–मीठे स्वरों से गुंजित होता रहा,जिसमें स्त्री–मन की हृदय–भेदी संवेदनाएँ भी थी और मन को झंकझोर देनेवाली वेदना भी। कहीं प्रेम और उदात्त समर्पण के शब्द थे,तो कहीं उलाहने और अधिकार माँगते स्वर भी। आज विदुषी साहित्यसेवी ...

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राबड़ी ने रहस्य खोल कर मचाया तूफान, नीतीश क्यों नहीं खोल रहे जुबान?

राबड़ी ने रहस्य खोल कर मचाया तूफान, नीतीश क्यों नहीं खोल रहे जुबान? नीतीश के गठबंधन में लौटने की बेचैनी पर लालू के खुलासे के बाद अब राबड़ी देवी ने एक ऐसे रहस्य से पर्दा उठा दिया है जिसके अनुसार नीतीश उनसे माफी मांग कर भी महागठबंधन में लौटने के लिए बेकरार थे. राबड़ी देवी ने ट्विट करके कहा है ...

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अलबेरूनी:एक महान सेक्युलर मुस्लिम मानवशास्त्री

अलबेरूनी:एक महान सेक्युलर मुस्लिम मानवशास्त्री अलबेरूनी ( 973-1048) बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी थे और फिरदौसी, अबू सीना और इब्न हैथाम के समकालीन थे. वह पहले इस्लामी विद्वान थे जिन्होंने हिंदू शास्त्र का विस्तृत अध्ययन पेश किया.   अलबेरूनी अफगानिस्तान में महमूद गजनी के दरबारी थे और भारत में उसके सैन्य अभियान के समय मौजूद थे. उन्होंने अपने भारत प्रवास के ...

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राष्ट्रकवि पं माखनलाल चतुर्वेदी की १३१वीं जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने दी काव्यांजलि 

राष्ट्रकवि पं माखनलाल चतुर्वेदी की १३१वीं जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने दी काव्यांजलि  पटना अप्रैल। देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, कवि और पत्रकार पं माखनलाल चतुर्वेदी सच्चे अर्थों में ‘भारतीय आत्मा‘ थे। उन्हें यह महान संबोधन राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने दिया था। वे जीवन–पर्यन्त राष्ट्र और राष्ट्र–भाषा के लिए संघर्ष रत रहे। स्वतंत्रता–संग्राम में उन्होंने जेल की यातनाएँ भी भोगी और हिंदी के प्रश्न ...

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