IAS को सस्पेंड करने वाले अखिलेश मुस्लिम हितैषी या मदरसा ध्वस्त करने वाले अखिलेश?

अखिलेश की राजनीतिक अनुभवहीनता का सब लाभ उठा रहे हैं. मीडिया भी और उनके करीब के नेता भी.akhilesh-yad

आईएएस दुर्गा के हटाये जाने की वजह अखिलेश से यह कहलवा गया कि उन्होंने एक मस्जिद निर्माण को रोकवा दिया इसलिए दुर्गा को नोएडा के एसडीएम पद से सस्पेंड कर दिया गया.

अखिलेश ने खुद कहा भी कि पवित्र रमजान में दुर्गा ने निर्माणाधीन मस्जिद को तोड़ने का फरमान जारी कर दिया जिससे साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ता.

अखिलेश को क्या यह पता नहीं कि इसी पवित्र रमजान में रामपुर के एक नौकरशाह ने सालों पुराने मदरसे को बुलडोजर चलवाकर गिरवा दिया. विरोध करने पर मदरसे के मौलवी को सलाखों के पीछे धकेल दिया.

एक अखिलेश वो हैं, जो नोएडा में कथित मस्जिद निर्माण को रोकने या उसे ध्वस्त करने का हुक्म मात्र देने वाली अफसर को निलंबित कर देते हैं, और दूसरे वह जो मदरसा को इसी पवित्र रमजान में ध्वस्त करने पर प्रशासनिक पदाधिकारियों से कोई सवाल तक नहीं पूछते.

रामपुर में मदरसा ध्वस्त करवाया

आखिर कौन सा अखिलेश मुसलमानों के तुष्ट करने वाले अखिलेश हैं. वह अखिलेश जो रामपुर में मदरसा ध्वस्त करवाते हैं या वह अखिलेश जो नोएडा में महज मस्जिद तोड़ने का आदेश देने वाली अफसर को निलंबित करते हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता कंवल भारती कहते हैं- दर असल यह मामला वैसा नहीं है जैसा बताया जा रहा है. सच तो यह है कि उत्तरप्रदेश की सरकार सिर्फ अखिलेश नहीं चलाते. आजम खान भी उत्तर प्रदेश की सरकार चलाते हैं. वह रमाजान में मदरसा गिरवा सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं.

दूसरा तथ्य इस मामले में यह है कि दुर्गा नागपाल का सस्पेंशन का मामला सिर्फ मस्जिद ध्वस्त करने का नहीं है. इसके पीछे की गंदी राजनीति को मीडिया देखना नहीं चाहता. दर असल दुर्गा ने नोएडा में बालू माफियाओं की करतूतों पर बुल्डोजर चला रखा था. हम तक जो सूत्रों से खबरें पहुंच रही हैं उसके अनुसार समाजवादी पार्टी के एक नेता हैं सुरेंद्र भाटिया. जिन्हें दुर्गा की, बालू माफियाओं के खिलाफ की गयी कार्रवाई नागवार गुजरी है. उन्होंने दुर्गा की शिकायत अखिलेश सरकार से कर दी. और अपने छुटभैये नेताओं के कहने में आकर जब राज्य सरकार ने दुर्ग को सस्पेंड कर दिया तो इस मामले को तोपने के लिए अखिलेश सरकार ने इसे मस्जिद से जोड़ दिया.

यह साधारण तर्कशक्ति का आदमी भी सोच सकता है कि जिस अखिलेश सरकार ने इसी पवित्र रमजान में इस्लामी मदरसे को रामपुर में ध्वस्त करवा दिया हो वह भला क्यों, उस जगह की मस्जिद के निर्माण को ध्वस्त करवाने से किसी अधिकारी को रोकेगा, जो जमीन खुद नजायज है. इस्लाम में नजायज जमीम पर इबादतगाह बनाने की कतई इजाजत नहीं है, इसे एक आम मुसलमान भी जानता है.

अखिलेश के चेहरे की मासूमियत के पीछ उनके लोगों के घिनावने चेहरों को समझने की जरूरत है.

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