भारत साम्प्रदायिक सद्भाव, सहिष्णुता व सहअस्तित्व की परम्परा का प्रतीक है

मैं मुस्लिम हूं तू हिंदू है लेकिन हैं दोनों इंसान

ला मैं तेरी गीता पढ़ लूं और तु मेरा कुरान

दिल में है बस दोस्ती और एक है अरमान

एक थाली में खाना खाये सारा हिंदुस्तान

भारत में हिंदुओं और मुसलमानों व अन्य धर्मों के लोगों के दरम्यान रवायती बिरादराना रिश्ते भारत की आजादी की लड़ाई से पहले, लड़ाई के दौरान और इस लड़ाई के बाद भी मौजूद रहे है. ये दोनों समुदाय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ कंधे से कंधा मिल कर लड़े. भारत क गंगा-जमुनी तहजीब  हमारी साझा संसकृति की मिसाल है जिसे हमें हमेशा जिंदा रखना होगा ताकि आपसी भाईचारा बना रहे.

 

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आज भी भारत के गली-चूकों में कई ऐसे धार्मिक स्थान, दरगाह व अन्य महत्वपूर्ण स्थल मिल जायेंगे जहां हिंदू और मुसलमान दोनों ही अपने सृद्धा सुमन अर्पित करने या मांगने आते हैं जिसका उदाहरण अजमेर शरीफ, कलियर शरीफ, बरेली आला हजरत, बदायू व हजरत निजामुद्दीन, देव शरीफ व अन्य जहां सभी धर्म के लोग हमेशा की तरह अभी-भी आते जाते रहते हैं. इस कड़ी में कुछ प्रतीक प्रथायें तथा घटनाये नीचे दी जा रही हैं जो इस देश की मिली-जुली संस्कृति की ओर इशारा करती है.

 

बहुत सी जगह हिंदू लड़के कुरान शरीफ और मुस्लिम लड़कियां गीता का पाठ करती हैं. आस्था और ज्ञान में फर्क है. ज्ञान किसी भी धर्म के बारे में बुरा नहीं है. यह हमारी साझी विरासत है. इसे संस्कृति भी कहा जाता है.

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हो सकता है किसी भी साथी के इस बारे में विचार ठीक ना हो. लेकिन इस में सच्चाई है.

 

धार्मिक लोग इस बात से शायद सहमत ना हों लेकिन ऐसे उदाहरण कई राज्यों में मिल सकते हैं. हमारी सांझा संस्कृति में यह देखा गया है कि अगर मस्जिद का निर्माण हो रहा है तो हिंदू भाई उसमें सहयोग करते हैं और अगर मंदिर का निर्माण हो रहा है तो मुसलमान भाई उसमें मदद करते हैं. ये सांझी संस्कृति हमें विरासत में मिली है.

 

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