भारत-मॉरीशस मैत्री संघ के फिर अध्यक्ष बने डॉ अनिल सुलभ

भारत-मॉरीशस मैत्री संघ के फिर अध्यक्ष बने डॉ अनिल सुलभ

भारत-मॉरीशस मैत्री संघ की आम सभा संपन्न। एक बार फिर सर्वसम्मति से डॉ. अनिल सुलभ अध्यक्ष निर्वाचित हुए। जल्द बनेगी कार्य समिति।

मॉरीशस सरकार द्वारा गठित भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन की अध्यक्ष और सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा सरिता बुधु की उपस्थिति में, गुरुवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में सपन्न हुई भारत मौरिशस मैत्री संघ की आमसभा में संघ के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ को सर्वसम्मति से पुनः मैत्री संघ का अध्यक्ष चुना गया। एक प्रस्ताव पारित कर डा सुलभ को संघ की कार्य समिति के पुनर्गठन हेतु भी अधिकृति किया गया है।

सभा को संबोधित करते हुए डा सरिता बुधु ने कहा कि मॉरीशस का भारत और विशेषकर बिहार के साथ आत्मा का संबंध है। हामारे पुरखे यहीं से वहाँ गए। दोनों राष्ट्रों के बीच जो आत्मिक सूत्र-बंधन है, उसे मैत्री-संघ और प्रगाढ़ करेगा। भारत-मौरिशस मैत्री-संघ के साथ बिहार- मौरिशस मैत्री-संघ का भी अस्तित्व बचाए रखना चाहिए। यह संघ दोनों देशों के बीच केवल साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों पर ही नहीं, शैक्षणिक और व्यावसायिक उन्नयन के प्रसंगों पर भी विचार करेगा और उसे सुदृढ़ करेगा। डा बुधु ने मैत्री-संघ के कोश हेतु १०० डालर की सहयोग राशि भी प्रदान की।

अपने कृतज्ञता-ज्ञापन में डा सुलभ ने कहा कि वर्ष २००५ में, जिन दिनों मुखेश्वर चुनी भारत में मौरिशस के राजदूत थे, पटना में बिहार मौरिशस मैत्री संघ की स्थापना हुई थी, जिसे बाद में भारत मौरिशस मैत्री संघ में बदला गया था। श्री चुनी संघ के मुख्य संरक्षक बनाए गए थे। इस संघ के माध्यम से मौरिशस के महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों की जन्मभूमि की खोज का एक बड़ा काम किया गया, जिसमें श्री चुनी की पुराभूमि की खोज भी सम्मिलित है। वर्ष २०१० में जब मौरिशस के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम अनिरुद्ध जगन्नाथ अपनी पत्नी सरोजनी जगन्नाथ के साथ बिहार की यात्रा पर आए थे, तो उनका पटना के होटेल मौर्य में एक भव्य नागरिक अभिनन्दन संघ के तत्त्वावधान में ही किया गया था।

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उन्होंने कहा कि विगत कुछ वर्षों से संस्था की गतिविधियाँ शिथिल हो गई थीं। किंतु डा बुधु की उपस्थित ने हममें नूतन उत्साह का सृजन किया है। आज की सभा ने पुनः मुझ पर जो दायित्व सौंपा है, उसकी पूर्ति करने की चेष्टा अवश्य होगी। यह संघ भारत-मौरिशस के बीच साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकत्व और परस्पर आदान-प्रदान के लिए निरन्तर सक्रिय रहेगा। शीघ्र ही एक सांस्कृतिक-दल मौरिशस की यात्रा पर जाएगा।
बैठक में डा सरिता बुधु के अतिरिक्त देव नारायण ओझा, डा शंकर प्रसाद, उर्मिला नारायण, डा मधु वर्मा, कुमार अनुपम, डा अर्चना त्रिपाठी,सुनील कुमार सिन्हा, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, डा पूनम आनंद, शशि भूषण कुमार, कमल किशोर ‘कमल’, श्याम बिहार प्रभाकर, डा कृष्ण कुमार, शमा कौसर शमा, सागरिका राय, मोहन गिरिडिहवी, डा पुरुषोत्तम कुमार, परवेज़ आलम, सदानंद प्रसाद, जयदेव मिश्र, डा पुष्पा जमुआर, डा सुषमा कुमारी, डा नीतू चौहान, डा राकेश दत्त मिश्र, सागरिका राय, प्रो सुनील कुमार झा, मुकेश कुमार सिन्हा, सुधीर कुमार झा, अनिता सिंह, पंकज प्रियम, चंदा मिश्र, नेहाल कुमार सिंह ‘निर्मल’, लोकेश आनंद, अमरनाथ कुमार आदि सदस्यगण और प्रबुद्धजन उपस्थित थे। डा सुलभ के अनुसार अगले कुछ दिनों में पुनर्गठित कार्यसमिति की घोषणा कर दी जाएगी।

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