इंडिया सोशल फोरम का राष्ट्रीय सम्मेलन 2 दिसंबर से पटना में

इंडिया सोशल फोरम का राष्ट्रीय सम्मेलन 2 दिसंबर से पटना में

इंडिया सोशल फोरम का राष्ट्रीय सम्मेलन 2 दिसंबर से पटना में। पर्यावरण से लेकर दलित-आदिवासियों के मुद्दे पर सक्रिय संगठनों के हजारों प्रतिनिधि जुटेंगे।

देशभर के सामाजिक, सांस्कृतिक, श्रमिक, दलित, आदिवासी संगंठनों से जुड़े हजारों प्रतिनिधि 2 दिसंबर से तीन दिनों के लिए पटना में जुटेंगे। सौ से अधिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे और गरिमा, न्याय और शांति के साथ लोकतंत्र को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। अंतिम दिन पटना घोषणापत्र जारी किया जाएगा।

इंडिया सोशल फोरम का आयोजन आगामी 2 से 4 दिसंबर को बिहार विद्यापीठ, कुर्जी, पटना में होने जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के हजारों की संख्या में सामाजिक संस्थाओं, संगठनों, शैक्षणिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह सभी तीन दिनों तक आठ अलग-अलग टीमों के तहत 100 से अधिक मुद्दों पर लगभग 120 विभिन्न सत्रों में चर्चा करेंगे। इस दौरान देश और दुनिया के हालात पर विमर्श किया जाएगा तथा एक मानवीय भारत, मानवीय विश्व की परिकल्पना को साकार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं को मजबूत किया जाएगा।

इंडिया सोशल फोरम की प्रक्रिया वर्ल्ड सोशल फोरम (विश्व सामाजिक मंच) से प्रेरित है। विश्व सामाजिक मंच की शुरुआत दो दशक से भी अधिक समय पहले दुनिया के सामाजिक आंदोलन, ट्रेड यूनियन और नागरिक समाज संगठनों के एक खुले मंच के रूप में हुई थी। पहला WSF ब्राजील में आयोजित किया गया था, जब दुनिया पूंजीवाद और नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के सबसे बुरे प्रभाव देख रही थी। डब्ल्यूएसएफ ने आवाज उठाई कि एक और दुनिया संभव है। यह दूसरी दुनिया स्वतंत्रता, समानता और न्याय के मूल्य पर आधारित हो सकती है। तब से डब्ल्यूएसएफ प्रक्रिया विश्व स्तर पर अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग तीव्रता के साथ जारी रही है।

इंडिया सोशल फोरम 2023 का आयोजन आगामी वर्ल्ड सोशल फोरम के क्रम में हो रहा है। काठमांडू, नेपाल में 14 से 19 फरवरी 2024 तक वर्ल्ड सोशल फोरम आयोजित होगा। बिहार के लिए इसका आयोजन एक गरिमा की बात है। आईएसएफ 2023 पूरे भारत में राज्य स्तरीय और जमीनी स्तर के संगठनों, आंदोलनों को एक साथ लाता है जो नागरिक और राजनीतिक अधिकारों, सामाजिक- आर्थिक अधिकारों और दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, श्रमिकों और अल्पसंख्यकों जैसी पहचान पर आधारित सामाजिक आंदोलन में लगे हुए हैं। यह ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों, अनौपचारिक श्रमिक संगठनों और अन्य संवेदनशील जनपक्षीय नागरिकों की भागीदारी को भी प्रेरित करती है। इसमें देश भर के अनेक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं।

उक्त जानकारी पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूपेश, प्रदीप प्रियदर्शी, सिस्टर डोरथी फर्नांडिस, तनवीर अख्तर, मोहम्मद काशिफ यूनुस, शाहिद कमाल, महेंद्र यादव, कपिलेश्वर राम, सौरव कुमार, अरशद अजमल, गणेश, प्रकाश लुइस ने दी।

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