अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस: मचलती हुई ख्वाहिशें हैं मुझमें, बुढ़ापा मुझपे इल्जाम है

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर लोग बुजुर्गों को बधाई और उनकी सेहत की दुआ दे रहे हैं. सीएम नीतीश कुमार ने भी ऐसा ही किया है. पर एक बुजुर्ग ध्रूव गुप्त कहते हैं कि बुढ़ापा उन पर इल्जाम है, अभी तो ख्वाहिशें जवान हैं.

आज अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस है। दुनिया के सभी बूढ़ों-बूढ़ियों को समर्पित एक दिन। आज के दिन सुबह-सुबह दो-चार मित्रों ने मेसेज बॉक्स में इस दिवस की बधाई दी तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।

अगर उम्र वृद्धावस्था का पैमाना है तो शायद मैं बूढ़ा हूं। पैमाना अगर सोच, इरादा, सपने और वक़्त के साथ चलने की ज़िद है तो बेशक़ बुढ़ापा मुझपर इल्ज़ाम है।

मुझमें धड़कता हुआ दिल और मेरी मचलती ख़्वाहिशें अभी जवान हैं ! सो बुढ़ापे को मैं सिरे से खारिज़ करता हूं। गुज़ारिश है कि मेरा शुमार अगले आदेश तक जवानों में ही किया जाय !

 

आपने आज के दिन की शुभकामनाएं दीं तो आपकी गिनती मेरे दुश्मनों में होगी। मेरे जिन हमउम्र दोस्तों और दोस्तीनियों ने बुढ़ापे को बिना किसी प्रतिरोध के स्वीकार कर लिया है, उन्हें मेरी शुभकामना और एक संदेश !

दोस्तों, आओ कुछ बवाल करें
यूं बुज़ुर्गी में दिन नहीं कटते !

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