लोकसेवक पद पर बैठ कर मोदी-योगी के प्रवक्ताओं को भी पछाड़ रहे हैं IPS अरविंद पांडेय

आईपीएस अफसर व बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक अरविंद पांडेय सरकारी पद पर रहते हुए इन दिनों  भाजपा व पीएम मोदी के प्रवक्ताओं को भी मात दे रहे हैं. मोदीगान में वह झूठें तथ्यों को भी खूब हवा देने में लगे हैं.

नौकरशाही न्यूज ब्यूरो

अगर कोई प्रवक्ता भाजपा या मोदीभक्ति में दिन रात लगा हो तो यह आम बात है लेकिन आईपीएस स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी पद पर रहते हुए दिन रात मोदीगान में लगा हो तो सवाल उठना लाजिमी है.  बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक हैं. अनेक जिलों के एसपी, अनेक प्रमंडलों के डीआईजी जैसे जिम्मेदार परद रह चुके अरविंद पांडेय पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से मोदी या योगी के गुणगाण में न सिर्फ लगें हैं, बल्कि झूठ का बखान करने में भी नहीं चूकते.

योगी की प्रशंसा में पद भी भूल गये आईपीएस अरविंद पांडेय

पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में मोदी सरकार ने 7.5 करोड़ युवाओं को( मुद्रा योजना के तहत) कर्ज दे कर आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है.

अरविंद पांडेय जैसे सजग और वरिष्ठ आईपीएस को यह पता है कि इतनी संख्या में लोगों को कर्ज नहीं दिया गया बल्कि यह लक्ष्य है. जबकि सच्चाई यह कि मुद्रा योजना के तहत मात्र 16 लाख 45 हजार 30 लोगों को कर्ज मिला है.

इसी तरह अरविंद पांडेय ने नोटबंदी का महिमामंडन करते हुए कहा है कि इससे नोटभक्षों का भक्षण हो गया है. जबकि आरबीआई के आंकड़ें खुद बताते हैं कि नोटबंदी से काले धन पर कोई खास असर नहीं हुआ और न ही, नोटबंदी का लाभ हुआ बल्कि इससे देश में भारी बेरोजगारी और मंदी आ गयी.

इससे पहले उत्तर प्रदेश का सीएम जब योगी आदित्यनात को बनाया जा रहा था तो पांडेय ने एक ऐसा पोस्ट डाला था जो एक सरकारी अधिकारी और लोकसेवक जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए ना तो सर्विस रूल के अनुकूल था और ना ही माकूल. उन्होंने लिखा था कि पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि  में जब मीडिया में यह स्वर उच्चरित होगा कि  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

ने कहा —— तो यह ध्वनि वास्तव में श्रवण-सुखद होगी. इतना ही नहीं उन्होंने लिखा है कि  भारत का सदा से स्वप्न रहा है कि

सन्यासी, शासक हो या शासक, सन्यासी सदृश आचरण करे. जबकि एक पुलिस अधिकारी के बतौर पांडेय को पता है कि योगी पर हत्या और हिंसा फैलाने जैसे मामलों में केस दर्ज था. अगर केस न भी होता तो सरकारी पद पर आसीन अफसर के लिए अपनी राजनीतिक भावनायें सार्वजनिक करने की आजादी तो नहीं है.

हाल ही में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छेड़खानी के विरोध छात्राओं के प्रदर्शन पर भी पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में तीखा हमला बोलते हुए लिखा गया है कि समय रहते अगर ऐसे लोगों को ना रोका गया तो बीएचयू, जेएनयू बन जायेगा. एक पुलिस अधिकारी को जहां महिलाओं के साथ हुई छेड़खानी पर चिंता जतानी चाहिए वहीं वह उनके विरुद्ध बयानबाजी करके योगी सरकार के गुणगान में लगे हैं.

 

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