जातीय जनगणना में दलित मुस्लिम की भी गिनती हो : मोर्चा

जातीय जनगणना में दलित मुस्लिम की भी गिनती हो : मोर्चा

अगर केंद्र जाति आधारित जनगणना पर तैयार नहीं हुआ, तो राज्य सरकार कराएगी। अब ऑल इंडिया मुस्लिम मोर्चा ने दलित मुस्लिमों की गिनती का उठाया सवाल।

जातिगत आधार पर जनगणना भारत एवं भारतीय समाज के संपूर्ण विकास के लिए समय की पुकार है। आज पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आल इण्डिया युनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता कमाल अशरफ राइन ने दलित मुस्लिमों की भी जातिगत जनगणना कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक इनकी आबादी का डाटा उपलब्ध नहीं होगा तब तक इन्हें धारा 341 में जगह मिलना मुमकिन नहीं है।

अशरफ ने कहा कि चाहे पार्लियामेंट हो या सुप्रीम कोर्ट, केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार, इनके समक्ष जब भी दलित मुस्लिम के अधिकार की बात रखी गई है, मोर्चा को हमेशा दलित मुस्लिम की आबादी का डाटा उपलब्ध कराने के नाम पर टाला गया है। अतः मोर्चा दलित मुस्लिमों की जातीय जनगणना की मांग पर आन्दोलन चलाएगा।

उन्होंने कहा कि 1931 की ब्रिटिश सरकार ने पहली जनगणना जातिगत आधार पर करायी। 1941 में जनगणना हुयी ही नहीं और 1951 में जनगणना होने से पहले ही 1948 में जनगणना संशोधन विधेयक आया जिसमें जातिय कौलम को ही खारिज करवा दिया गया तब से आज तक जातिगत आधार पर जनगणना करायी ही नहीं आती।

अशरफ ने कहा कि जातिगत आधार पर जनगणना कराने के लिए (Census Act 1948 ) में संशोधन कर 1931 की तरह जातिवार कौलम जोड़ना होगा जिसके लिए केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दलित मुस्लिम तहरीक के संस्थापक व मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ एजाज अली ने जब भी दलित मुसलमानों को अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल करने की मांग की हमेशा यही प्रश्न उठता रहा कि इनकी आबादी कितनी है?

मोर्चा के महासचिव मो. मुश्ताक आजाद ने कहा कि मुसलमानों में पायी जानेवाली दलित बिरादरियां मसलन धोबी,नट, बंजारा, हलालखोर, मेहतर, भंगी भांट, भटियारा, मोची, पासी, मंगता, मदारी, मिरासी, खटिक ( कुंजडा) जुलाहा आदि का नाम अनुसूचित जाति सूची में मौजूद है लेकिन संविधान की धारा 341 पर 1950 में लगी धार्मिक प्रतिबंध के चलते ये जातियां अपनी मूल आरक्षण से वंचित हैं, और देश के मुख्य धारा से आज भी कटे हुए हैं। इन्हें मुख्य धारा में लाना देश एवं समाज हित के लिए बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ एजाज अली ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखकर अपील की है कि दलित मुस्लिम जातियों की भी जनगणना कराई जाए।

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मोर्चा के सचिव मो. जहांगीर आलम ने कहा कि जब आरक्षण के प्रत्येक श्रेणी में उस श्रेणी के मुसलमानों को भी आरक्षण पाने का अधिकार है तो फिर जनगणना भी जातिगत आधार पर किये जाने में किसी वर्ग के सदस्यों को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मो रफीक आलम जमाली, मो शमसाद आलम, मो जावेद अनवर उर्फ पप्पू आदि उपस्थित थे।

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