मुसलमानों में पैठ जमाने के राज्यव्यापी अभियान में जुटा JDU

मीडिया के शोर-शराबे से दूर JDU अल्पसंख्यक सेल के नेता ‘रूठे’ मुसलमानों को मनाने के लिए राज्यव्यापी अभियान में जुटे हैं.

इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

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Irshadul Haque, Editor naukarshahi.com

इस अभियान के तहत जनता दल यू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कद्दावर नेताओं की टीम हर जिलों और प्रखंडों में कैम्प लगा रही है. बुथ स्तर के कार्यकर्ताओं से मिलना. जनता के रुझान को समझना और इस रुझान से मिले फिडबैक के आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है.

अब तक इस टीम ने औरंगाबाद, सीवान, गोपालगंज और चम्पारण में प्रखंड स्तर तक का दौरा पूरा कर चुकी है. आने वाले कुछ दिनों तक यह सिलसिला चलेगा.

इन बैठकों में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष तनवीर अख्तर अपने दो उपाध्यक्षों- मेजर इकबाल हैदर खान ( Eqbal Major) और मुस्तफा कमाल (Mustafa Kamal) के साथ हर जिले में कूच कर रहे हैं. इस टीम में प्रकोष्ठ के महासचिव आबिद हुसैन व गुलाम गौस राईन भी शामिल हैं. जबकि इस अभियान में राज्य परिषद के सदस्य फैज अहमद, जिला अध्यक्ष शौऐब रजा के अलावा परवेज खान, आफ्ता आलम और शरफुद्दीन भी प्रमुखता से लगे हुए हैं.

सुबह से देर रात तक समीक्षा बैठक और अल्पसंख्यक संवाद कार्यक्रम का दौर चल रहा है.

15 साल बनाम 15 साल और मुसलमान

ऐसे समय में जब पिछले वर्ष के आखिर में नागरिकता संशोधन कानून को पारित करवाने में जदयू ने, भाजपा का समर्थन कर दिया था तो मुसलमानों में इसके खिलाफ भारी नाराजगी उभरी थी. सच मानिये तो मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग नीतीश कुमार से नाराज हो गया था. ऐसे में जनता दल यू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेताओं के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे नीतीश से रूठे मुसलमानों को कैसे अपने पक्ष में करते हैं.

मोतिहार में अल्पसंख्यकों के साथ समीक्षा बैठक करते जदयू नेता

हालांकि जहां तक अल्पसंख्यक समुदाय के लिए नीतीश सरकार द्वारा किये गये कामों की बात है तो इस मामले में जदूय अल्पसंख्यक प्रकोषठ के उपाध्यक्ष इकबाल हैदर खान ( Eqbal Major) उपलब्धियों की पूरी लिस्ट सामने रख देते हैं. वह बताते हैं कि लालू-राबड़ी शासन के 15 साल से माननीय मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल की तुलना कर लीजिए. जमीन आसमान का फर्क दिख जायेगा. Eqbal Major बताते हैं. राज्य भर के गांव-गांव के कब्रिस्तानों की घेराबंदी पूरी हो चुकी है. हर जिले में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अल्पसंख्यक छात्रावास में बच्चे पढ़ कर अपने करियर को संवार रहे हैं. पिछले पंद्रह वर्षों में अल्पसंख्यक समुदाय के दो लाख से ज्यादा युवक शिक्षक के रूप में नियुक्त किये जा चुके हैं.

इतना ही नहीं स्थानीय निकायों ( पंचायतों और नगर निकायों ) में अतिपिछड़ों को आरक्षण का लाभ मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर उठाया है. इकबाल हैदर यह भी बताते हैं कि बिहार में तरक्की की रफ्तार को मुसमलानों ने भरपूर लाभ उठाया है.

उधर जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष व एमएलसी तन्वीर अख्तर ( Tanweer Akhtar) अल्पसंख्यक संवाद कार्यक्रम में मुस्लिम युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए और उन्हें जदयू और नीतीश कुमार के करीब लाने की कोशिश करते हैं.

अक्टूबर-नवम्बर में बिहार में विधान सभा चुनाव होना है. उससे पहले जदयू ने राजद के पांच विधान पार्षदों को अपनी पार्टी में मिला लिया है. इनमें एक मुसलमान हैं. अभी-अभी जदयू ने गुलमा गौस को विधान परिषद का सदस्य बनाया है. इस तरह विधान परिषद में मुस्लिम विधायकों की सर्वाधिक संख्या जदयू में ही हो गयी है. ऐसे में जदयू की रणनीति है कि मुस्लिम नेतृत्व के स्तर पर भी राजद को चुनौती पेश करे.

ऐसे में जदयू की मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कितनी कामयाब होगी, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा लेकिन इतना तो तय है कि जदयू के अल्पसंख्यकों को अफनी ओर खीचने के अभियान से राजद चौकन्ना हो गया है.

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