क्या अब BJP से टकराव के मूड में है JDU

क्या अब BJP से टकराव के मूड में है JDU

Nitish kumar Narendra Modi
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Irshadul Haque

महज दस महीने में आरसीपी सिंह की जगह जदयू ने ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया है. और भाजपा के प्रति उसका तेवर सख्त हो गया है.

कल दिल्ली मुख्यालय में जदयू के नये अध्यक्ष की घोषणा के साथ ही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया. इन प्रस्तावों में एक जातीय जनगणना ( Caste Censusu) कराना और दूसरा जनसंख्या वृद्धि ( Population Control) पर रोक के लिए कठोर कानून के विरोध का ऐलान शामिल है.

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उपर्युक्त दोनों मुद्दे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सियासी एजेंडे का हिस्सा हैंं. जनसंख्या नियंत्रण मामले में उत्तर प्रदेश व असम की भाजपा सरकारें सख्त कानून बनाने के प्रस्तवा पर विचार कर रही हैं. जबकि केंद्र की भाजपा सरकार ने साफ कर दिया है कि वह जातीय जनगणना नहीं करायेगी.

लेकिन इन दोनों मामलों में जनता दल युनाइटेड( JDU) ने अपनी गठबंधन सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ स्पष्ट लाइन लेने की घोषणा कर दी है. इससे दोनों सहयोगी दलों के बीच में टकराव की स्थति उत्पन्न होने के आसार हैं.

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पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने याद दिलाया था कि उनकी सरकार ने विधान सभा से दो बार प्रस्ताव पारित कर केंद्र से मांग कर चुकी है कि जातीय जनगणना ( Caste Census) करायी जाये. इस मामले में बिहार की तमाम विपक्षी पार्टियों ने नीतीश कुमार के समर्थन में आवाज उठाई है. इतना ही नहीं पिछले दिनों नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात भी हुई है. इस मुलाकात का स्पष्ट संदेश है कि इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बनाया जाये. इस मुद्दे पर बिहार भाजपा अलग थलग पड़ती जा रही है. उसके राज्यस्तरीय नेता कुछ बोलने के बजाये अपनी पार्टी के आलाकमान की तरफ देख रहे हैं. उधर नीतीश कुमार ने जातीय जनगणना पर अलग-अलग तरह से भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. दो दिन पहले जनता दल युनाइटेड के ओबीसी और ईबीसी समुदायों के तमाम सांसदों ने एक चिट्ठी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी. इस चिट्ठी में उनसे साफ कहा गया है कि जातीय जनगणना जरूर होनी चाहिए.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ( BJP) पिछड़ों की संख्या की गणनना कराने पर इसलिए राजी नहीं हो रही है कि इससे उसके खिलाफ पिछड़े वर्ग के बीच गोलबंदी हो सकती है. ऐसा इसलिए कि राजनीतिक पदों के साथ साथ शासन प्रशासन और विभिन्न पदों पर पिछड़े वर्गों की अल्प नुमाइंदगी की पोल खुल जायेगी. इससे पिछड़े वर्गों में नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है.

लेकिन अब तक भारतीय जनता पार्टी ने जो संकेत दिये हैं उससे साफ है कि वह जाति आधारित जनगणना ( Caste Census) कराने को तैयार नहीं है. ऐसी स्थिति में भाजपा पर उसके सहयोगी दल जदयू के दबाव के बाद क्या हालात होंगे , यह देखने वाली बात है. कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं. जबकि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की शर्मनाक हार के बाद उसके सहयोगी दलों को यह एहसास पक्का होता जा रहा है कि भाजपा अगर उन्हें इग्नोर करेगी तो उसे ही नुक्सान होगा.

लेकिन इन तमाम दबावों के बाद अगर भाजपा अपनी सहयोगी पार्टी जदयू ( JDU) की बात नहीं मानती है तो स्वाभाविक है कि उसके गठबंधन सहयोगी एक हद तक टकराव मोल लेने में भी पीछे नहीं हटेंगे.

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