क्या केंद्रीय मंत्री के दंगा आरोपी बेटा के मामले में एनडीए गठबंधन पर खतरा मंडरा रहा है ?

बिहार के भागलपुर में पिछले दिनों दो गुटों में हुए विवाद में आरोपी व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बहाने भाजपा को कड़ा संदेश दिया है. केसी त्यागी ने कहा है कि कानून का मखौल उड़ेगा तो एनडीए पर खरोच आयेगी.

 

नौकरशाही मीडिया

जदयू ने 11 दिनों की रस्साकशी के बाद भाजपा को कड़ा संदेश देने के लिए अपने वरिष्ठतम प्रवक्ता केसी त्यागी को चुना है. केसी त्यागी की बातों को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जाता है और उनके बयान को नीतीश कुमार का बयान माना जाता है.

त्यागी ने साफ शब्दों में कहा है कि अर्जित चौबे को या तो गिरफ्तारी देनी होगी या सरेंडर करना होगा.

याद रहे कि चौबे के बेटे पर भागलपुर के नाथ नगर में दंगा भड़काने और कानून का उल्लंघन करने का आरोप है. इस मामले में अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर रखा है.

विपक्ष के लगातार प्रहार से नीतीश सरकार की साख पर असर पड़ रहा है. लेकिन सरकार के सामने इस मामले में और भी बड़ी फजीहत की स्थिति तब उतपन्न हो गयी जब अश्विनी चौबे के बेटे ने कहा कि वह एफआईआर को कूडेदान में डालते हैं. माना जा रहा है कि अर्जित के इस बयान के पीछ भाजपा के कुछ बड़े नेताओं की सह जरूर रही होगी. ऐसे में जदयू और भाजपा के बीच आपसी दबाव की राजनीति बढ़ी है. पिछले महीनों में यह पहला मौकै है जब जदयू की तरफ से भाजपा को कड़ा संदेश दिया गया है. अब सवाल उठता है कि चौबे के बेटे गिरफ्तारी देते हैं या दोनों दलों के बीच तलवार और चमकाई जायेगी.

 

इस बीच इस मुद्दे को ले कर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव लगातार नीतीश सरकार को घेरने में लगे हैं. तेजस्वी ने यहां तक कह रखा है कि केंद्रीय मंत्री का दंगाई बेटा हाथ में तलवार लिए फेसबुक लाइव कर रहा है और विधायकों के साथ जुलूस में हिस्सा ले रहा है लेकिन सरकार उन्हें गिरफ्तार करने का साहस नहीं कर पा रही है. तेजस्वी ने यहां तक चुनौती दी है कि अगर सरकार के बूते में उन्हें गिरफ्तार करने का साहस नहीं तो वह मुझे प्रशासनिक अधिकार दे और चार पुलिसकर्मी को मेरे साथ भेजे मैं उसे घसीट कर गिरफ्तार कर दूंगा.

तेजस्वी के इस लगातार हमले के कारण जदयू में बेचैनी बढ़ गयी है. हालांकि नीतीश कुमार ने पिछले दिनों कहा था कि भ्रष्टाचार और अपराध के मामले पर उनका स्टैंड बदला नहीं है. कानून का पालन कराना सरकार की जिम्मेदारी है. लेकिन उनके बयान के दो दिन बाद ही दंगा के आरोपी व केंद्रीय मंत्री के बेटे ने पटना में प्रसे कांफ्रेंस करके कहा था कि वे एफआईआर को कूड़ेदान में डालते हैं.

अर्जित चौबे के इस बयान को सीध नीतीश कुमार को चुनौती के रूप में देखा गया.

जदयू व भाजपा के बीच गहराते इस बयान के बाद दोनों दलों के संबंधों पर सवाल उठना स्वाभिक है. उधर अश्विनी चौबे लगातार कह रहे है ंकि उनका बेटा निर्दोष है और अगर उसके खिलाफ दोष साबित हो गया तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंग. हालांकि इस मामले में भाजपा के दीगर नेता चुप्पी साधे रखने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं.

उधर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने यह कह कर भाजपा पर और दबाव बढ़ा दिया है कि अर्जित को कानून और पुलिस अधिकारियों पर भरोसा करना चाहिए. त्यागी ने यहां तक कहा कि  अगर कानून का पालन नहीं किया गया तो एनडीए के घटक दलों- भाजपा, जदयू, आरएलएसपी व लोजपा के संबंदों पर खरोच आयेगी.

अब देखना है कि भाजपा नेता, जदयू के  इस बयान के बाद क्या रुक अपनाते हैं.

 

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