जिसके सिर पर मोदी जैसे नेता का हाथ, वह क्यों सदन में रोया

जिसके सिर पर मोदी जैसे नेता का हाथ, वह क्यों सदन में रोया

संसद और विधानसभाओं के पटल पर अनेक नेता रोए हैं, पर शायद पहली बार एक मुख्यमंत्री के आंसू छलक आए। उनके सिर पर मोदी जैसे बड़े नेता का हाथ है, फिर क्यों रोए?

कुमार अनिल

आज एक अप्रत्याशित घटना हुई। जिस मुख्यमंत्री ने किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए सड़क खोद डाली थी, आज वह भरे सदन में रो पड़ा। आंसू पोंछे। गला भर आया और उन्हें कुछ क्षण रुकना पड़ा। कहा, मुझे रातभर नींद नहीं आई। ये मुख्यमंत्री है हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर। आज वे कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए रो पड़े।

आश्चर्य इस बात को लेकर भी है कि जिसके सिर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेता का हाथ हो, भला वह क्यों रोया?

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एक बात तो स्पष्ट है कि हरियाणा के गांव-गांव में किसान आंदोलन जड़ें जमा चुका है। शुरू में ऐसा नहीं था। शुरुआत पंजाब के किसानों ने की। हरियाणा में भी आंदोलन था, पर वह पंजाब जितना गहरा नहीं था। इसीलिए शुरू में भाजपा नेताओं ने आंदोलन को सिर्फ एक प्रदेश का बताया। लेकिन बहुत जल्द आंदोलन हरियाणा में भी फैल गया। ऐसा भी नहीं है कि हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन को रोकने की कोशिश नहीं की।

हरियाणा सरकार ने शुरू में किसान आंदोलन के सामने अनेक बाधाएं खड़ी कीं। सड़क तक खोद डाली गई। लेकिन दमन से आंदोलन और भी फैल गया। अब हालत ऐसी हो गई कि खुद मुख्यमंत्री कहीं भी कोई जनसभा नहीं कर पाए हैं। एक सभा करनी चाही तो किसानों ने मंच तक उखाड़ दिया

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आज कांग्रेस ने खट्टर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। हालांकि, सरकार ने बहुमत साबित कर दिया, लेकिन भाजपा नेताओं को मालूम है कि सदन में बहुमत होने के बावजूद जमीन पर स्थितियां प्रतिकूल बनी हुई हैं। इतिहास में ऐसे उदाहरण भरे हैं, जब किसी बड़े आंदोलन के कारण किसी सरकार को जाना पड़ा है या बाद में चुनाव होने पर उसे हार का मुंह देखना पड़ा है।

आप गौर करें, तो पाएंगे कि मुख्यमंत्री बेहद विकट स्थिति में फंसे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन अपने ही राज्य में किसी गांव में सभा नहीं कर पा रहे। खास बात यह है कि उनकी मदद के लिए भाजपा के किसी बड़े नेता ने ऐसा एलान नहीं किया कि वे हरियाणा के किसानों को समझाने के लिए उनसे संवाद करेंगे। तो क्या उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। अटकलें लगाई जा सकती हैं, पर दावे से कुछ कह नहीं सकते कि आखिर मुख्यमंत्री होते हुए उनके आंसू क्यों छलके।

सोशल मीडिया पर मनोहर लाल खट्टर के आंसुओं वाला वीडियो वायरल है। सैकड़ों लोग प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। पत्रकार अजीत अंजुम ने कहा- ये वही हैं, जिन्होंने सड़कें खुदवाईं। पूरी फोर्स झोंक दी, ताकि किसान दिल्ली तक न पहुंचें। इतने किसानों की मौत हुई, लेकिन पीएम-सीएम ने जिक्र तक नहीं किया।

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