गरीब महासम्मेलन की तैयारियों के दौरान जीतन मांझी ने पत्रकारों को कुछ इस तरह रिझाया

पटना में गरीब महासम्मेलन की तैयारियों में लगे जीतन राम मांझी अपने मुख्यमंत्रित्वकाल को विकास स्वर्णयुग करार दे रहे हैं. वह लोगों को बता रहे हैं कि नीतीश एक दलित मुख्यमंत्री की लोकप्रियता से न सिर्फ घबरा गे थे बल्कि जलने भी लगे थे.
हिंदुस्तान अवाम मोर्चा आगामी 8 अप्रैल को पटना के गांधीमैदन में गरीब महासम्मेलन का आयोजन कर रहा है. मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद मांझी की पार्टी द्वारा यह दूसरा सम्मेलन है जो गांधी मैदान में होने जा रहा है. हालांकि इससे पहले हुए सम्मेलन में अपेक्षा के अनुरूप भीड़ नहीं जुटी थी. तब मांझी ने आरोप लगाया था कि प्रशासन ने उनके लोगों को गांधी मैदान पहुंचने में बाधा उत्पन्न किया था.
मांझी ने पत्रकारों की समस्या के भी निदान की बात कही और कहा कि पत्रकारों के समक्ष गंभीर चुनौती होती है. उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव के बाद अगर उनकी सरकार बनी तो गरीब तबके के पत्रकारों के लिए पांच हजार रुपये मासिक मानदेय दिलवायेंगे. हालांकि मांझी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि गरीब तबका की किस जाति के पत्रकारों को यह सुविधा मिलेगी. याद रहे कि पत्रकारिता में दलित व पिछड़ी जातियों के पत्रकारों की संख्या काफी कम है.
पिछले सम्मेलन से इस बार ज्यादा भीड़ जुटाने में लगे मांझी ने पुनपुन में कहा कि नीतीश कुमार एवं उनकी सरकार दलित विरोधी है. कानूनी हथकंडा अपनाकर दलितों का शोषण कर रही है. जब हम मुख्यमंत्री थें तो बिहार तेजी से विकास के रास्ते पर चल रहा था. जिससे हमारी लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ती जा रही थी. उन्होंने कहा कि इसी बात से घबराकर नीतीश कुमार में हमें कुर्सी से हटा दिया, ताकि कोई दलित का बेटा एक गरीब का बेटा आगे ना बढ़ जाय।
जनसंपर्क अभियान के दौरान मांझी ने कहा जब वे मुख्यमंत्री थे तो गरीबों के लिए 34 नई योजनाओं को नीतीश कुमार के रखे ताकि असहाय और दबे-कुचके गरीबों का उत्थान हो सके। परन्तु उससे नीतीश कुमार ने पद से हटा दिया.

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