24 घंटे में बदली पटना की सियासी हवा, अब हर तरफ कर्पूरी चर्चा

24 घंटे में बदली पटना की सियासी हवा, अब हर तरफ कर्पूरी चर्चा

24 घंटे में बदली पटना की सियासी हवा, अब हर तरफ कर्पूरी चर्चा। कल राममंदिर की बातें, आज कर्पूरी जयंती के होर्डिंग से सड़कें पटीं। राजद-जदयू का कार्यक्रम कल।

पटना की सड़कें कर्पूरी जयंती की होर्डिंग, बैनर से पट गई हैं। डाक बंगला चौराहा, स्टेशन से लेकर वीरचंद पटेल पथ और बेली रोड पर जहां देखिए, वहां कर्पूरी जयंती के कार्यक्रम के बैनर वहरा रहे हैं। कल दिन भर पटना राममंदिर की चर्चा में मशगूल था और 24 घंटे बाद आज पिछड़ों-अतिपिछड़ों के बड़े नेता कर्पूरी ठाकुर छा गए हैं। कल 24 जनवरी को उनकी जन्मशती पर जदयू और राजद के बड़े कार्यक्रम हैं। एनडीए के घटक उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोजद ने एक दिन पहले ही जयंती मनाई। उसके भी बैनर शहर में देखे जा सकते हैं।

जदयू की तरफ से कल कर्पूरी जयंती समारोह पर भारी जुटान की तैयारी है। नेताओं की कई टीमों ने राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा किया है। पटना में पिछले एक हफ्ते से तैयारी चल रही है। मैदान को सजाने को काम तेजी से चल रहा है। समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अतिपिछड़ों के लिए कोई बड़ा एलान भी कर सकते हैं।

इधर राजद ने भी कल कर्पूरी जयंती पर राज्य भर से समर्थकों को जुटाने का निर्णय लिया है। पार्टी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बताया कि कल पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित समारोह का उद्घाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद करेंगे। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव समारोह के मुख्य अतिथि होंगे जबकि समारोह की अध्यक्षता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह करेंगे। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रखंड स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ हीं पार्टी के सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व प्रत्याशी राज्य सरकार के मंत्री सहित बड़ी संख्या में कर्पूरी जी के विचार धारा को मानने वाले लोग शामिल होंगे।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि राजद का गठन ही कर्पूरी जी के सपनों को साकार करने के लिए हुआ था। नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली बिहार की महागठबंधन सरकार ने जातीय जनगणना कराकर उसके आधार पर आरक्षण का दायरा बढ़ाकर कर्पूरी जी के जन्मशती के अवसर पर उनके सपने को साकार किया है। जिस लालू जी के गोद में कर्पूरी जी ने अंतिम सांस ली थी वह लालू जी जब मुख्यमंत्री बने तो समाज के अंतिम पायदान के लोगों विशेषकर अतिपिछड़ों और दलित समुदाय के लोगों को राजनीति के मुख्य धारा में लाने के साथ हीं प्रशासनिक महकमे में भागीदारी देने का काम किया था। और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों का एहसास कराया था।

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