केदारनाथ के पंडित मोदी से नाराज, कहा-पीएम ने तोड़ी मर्यादा

केदारनाथ के पंडित मोदी से नाराज, कहा-पीएम ने तोड़ी मर्यादा

इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुरी तरह फंस गए। केदारनाथ तीर्थ के पुरोहित और पंडित मोदी से बेहद नाराज हैं। उन्होंने कहा, मोदी ने गर्भगृह की मर्यादा तोड़ी।

आचार्य संतोष 6िवोदी प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करते।

कुमार अनिल

आज अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर छा गए हैं। छा गए हैं किसी अच्छे कारण से नहीं, बल्कि हिंदुओं की आस्था के प्रतीक केदारनाथ तीर्थ स्थल की मर्यादा तोड़ने के लिए। केदारनाथ के पुरोहित और पंडितों ने खुलेआम प्रधानमंत्री की खिंचाई की है।

कैमराजीवी-प्रचारजीवी जैसे नामों से विभूषित होने वाले प्रधानमंत्री इस बार केदारनाथ में देशभर के टीवी चैनलों को ले जाकर फंस गए। पंडित समाज आक्रोश जता रहा है। उनके आक्रोश के कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं।

केदारनाथ के आचार्य संतोष त्रिवेदी ने मीडिया के सामने आकर दोटूक प्रधानमंत्री मोदी पर केदारनाथ की मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया। कहा, केदारनाथ हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। केदारनाथ का गर्भगृह (केंद्र) सबसे पवित्र है। इसके दर्शन को गुप्त दर्शन कहा जाता है। कोई कभी भी यहां कैमरा लेकर उसे लाइव नहीं कर सकता। पंडा समाज ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दो दिन पहले ही स्पष्ट रूप से कह दिया था कि गर्भगृह में कोई कैमरा नहीं होना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री ने हमारी एक नहीं सुनी और आस्था के केंद्र को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए प्रचार की वस्तु बना दिया।

केदारनाथ के पुरोहितों के विरोध को बाद लोग प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर आलोचना कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने वीडियो शेयर करते हुए कहा-प्रधानमंत्री का व्यवहार स्तब्ध करनेवाला है। उत्तराखंड कांग्रेस के नेता देवेंद्र यादव ने कहा-आस्था से निर्मित परम्पराओं को तोड़ कर संवेदनाओं का तिरस्कार @narendramodi जी की खासियत है। गुप्त दर्शनों को कैमरे लगा कर दुनिया के सामने आम करने से आहत #तीर्थ_पुरोहितों की व्यथा आचार्य संतोष त्रिवेदी जी के शब्द बयान कर रहे हैं।प्रसिद्ध अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी तीर्थयात्रा के प्रचार करने पर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की है।

पूर्व आईपीएस विजय शंकर सिंह ने भगत सिंह का कथन शेयर किया-एक अत्याचारी शासक के लिए जरूरी है कि वह धर्म में असाधारण आस्था दिखाये। जनता ऐसे शासक के दुर्व्यवहार के प्रति कम सचेत होती है। उसे, वह ईश्वर से डरने वाला पवित्र मानती है। वह आसानी से उसके विरोध में भी नही जाती, क्योंकि उसे विश्वास रहता है कि, देवता भी शासक के साथ हैं।

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