खड़गे प्रत्याशी बने, भक्त मंडली का टूलकिट हुआ बेकार

खड़गे प्रत्याशी बने, भक्त मंडली का टूलकिट हुआ बेकार

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन कर दिया। प्रमुख नेता, जी-23 के नेता भी प्रस्तावक बने। भक्त मंडली का टूलकिट हुआ बेकार।

कुमार अनिल

कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को नामांकन दाखिल कर दिया। दिग्विजय सिंह, अशोक गहलोत सहित जी-23 के नेता मनीष तिवारी, आनंद शर्मा भी प्रस्तावक बने। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता नामांकन के वक्त मौजूद थे। इससे कांग्रेस में जोश दिख रहा है, लेकिन अजीब बात यह है कि राहुल गांधी के जूतों पर भी टिप्पणी करनेवाली भक्त मंडली में उदासी छा गई है। गोदी मीडिया के लिए भी खड़गे का उतरना जमा नहीं। भक्त मंडली और गोदी मीडिया टूलकिट तैयार करके बैठी थी, लेकिन वह बेकार साबित हो गया।

मल्लिकार्जुन खड़गे पुराने नेता रहे हैं। लॉ की पढ़ाई के बाद मजदूरों के अधिकार के लिए लड़े। दलित परिवार से आते हैं, साथ ही बुद्ध-दर्शन की बहुत इज्जत करते हैं। केंद्र में मंत्री भी रहे। लोकसभा में नेता रहे। अभी राज्यसभा में नेता हैं। कोई विवाद में कभी नहीं रहे। साफ-सुथरी छवि है। गांधी-नेहरू की विचारधारा रग-रग में बसी है।

अचानक खड़गे जैसे नेता के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए मसाला तैयार करना भक्त मंडली के टेढ़ी खीर हो गया है। उसने दिग्विजय सिंह के खिलाफ अभियान छेड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी। उनकी दिली इच्छा तो थी कि राहुल गांधी अध्यक्ष बनें, लेकिन वह तो होना न था। सारा तैयार मसाला (टूलकिट) बेकार हो गया, जिससे वे कांग्रेस के संभावित अध्यक्ष पर हमला बोलते।

गोदी मीडिया का हाल भी बेहाल है। गोदी मीडिया कह रहा है कांग्रेस को शक्ति नहीं, भक्ति चाहिए। उनकी इच्छा थी कि दिग्विजय प्रत्याशी बनते। वे नहीं बने, तो थड़गे को गांधी परिवार का भक्त साबित करने में जुटे हैं, लेकिन मामला जम नहीं रहा। कोई भी पूछ सकता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा क्या हैं? भाजपा की शक्ति किसके पास है? खैर, यह पूछने का न साहस और न नैतिकता गोदी मीडिया के पास है। नड्डा साहब को 2024 तक के लिए एक्सटेंशन दे दिया गया है, उस पर किसी की हिम्मत नहीं हो सकती कि पूछे कि एक्सटेंशन क्यों, चुनाव क्यों नहीं।

इधर कांग्रेस में उत्साह देखा जा रहा है। अध्यक्ष पद के जितने संभावित प्रत्याशी थे, सभी खड़गे के प्रस्तावक बन गए हैं। शशि थरूर ने भी नामांकन कर दिया है। उन्होंने मीडिया से भी बात की। कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव अन्य दलों के लिए सीख है।

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