खेत बचाओ के बाद अब बैंक बचाओ, देश बचाओ

खेत बचाओ के बाद अब बैंक बचाओ, देश बचाओ

खेत बचाओ देश बचाओ नारे के साथ किसान आंदोलन जारी है, इस बीच आज सेशल मीडिया में बैंक बताओ, देश बचाओ अभियान चला। बैंक निजीकरण से आपको क्या फर्क पड़ेगा?

कुमार अनिल

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता देशभर में सभाएं कर रहे हैं। वे खेत बचाओ- देश बचाओ #bankbachao_deshbachao का नारा लगा रहे हैं। इसका अर्थ है खेतों को कॉरपोरेट के हाथ में जाने से बचाना। आज सोशल मीडिया पर बैंक बचाओ-देश बचाओ ट्रेंड कर रहा है। बैंक बचाओ मतलब बैंक को बड़े कॉरपोरेट के हाथों में जाने से बचाओ। इस तरह खेत और बैंक दोनों को बड़े कॉरपोरेट से बचाने का अभियान चल पड़ा है।

सवाल यह है कि बैंक अगर निजी हाथों में चला गया, तो आम आदमी को क्या फर्क पड़ेगा? देश के चर्चित अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा-पहले बैंक डकैत होते थे। उसके बाद अंबानी, माल्या, मेहुल भाई, नीरव मोदी आए। उन्होंने बैंकों से हजारों करोड़ कर्ज लिये और भाग खड़े हुए। अब हमारी सरकार है, जो उन्हीं के हाथों बैंक सौंप देना चाहती है। इंटिया टुडे के अनुसार पिछले साल सितंबर तक 38 डिफाल्टर देश से भाग गए। इन भगोड़ों के कारण बैंक संकट में पड़ते हैं। आम आदमी अपना ही पैसा नहीं निकाल पाता।

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प्रशांत भूषण ने वित्त मंत्री का बयान कोट किया-आईडीबीआई के अलावा हम दो पीएसयू बैंक और जेनरल इंश्यूरेंस कं. के निजीकरण का प्रस्ताव देते हैं। प्रशांत कहते हैं हमारी संपदा उन क्रोनी को बेची जा रही है, जो लूटने के बाद भाग जाएंगे।

प्रखर वर्मा ने ट्विट किया- 1969 में सरकार ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, अब सरकार इन्हें बड़े उद्योगपतियों के हाथों बेच रही है।अनेक लोगों ने आंकड़ों के साथ साबित किया है कि किस प्रकार पब्लिक बैंक गरीब लोगों की मदद करते हैं। प्राइवेट होने पर अब इन गरीबों को फिर से सूदखोरों के पास जाना होगा।

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आप गुरजात ने ट्विट किया, पब्लिक बैंकों पर लोगों का भरोसा है। इंश्योरेंस सेक्टर में लोग सबसे ज्यादा एलआईसी पर भरोसा करते हैं। इस सेक्टर में भी निजी कंपनी का दबदबा होने पर लोग क्या करेंगे।

वीके शर्मा ने ट्विट किया- बैंक निजीकरण का मतलब है ट्रेड यूनियन अधिकार खत्म हो जाएंगे। काम के घंटे बढ़ जाएंगे। एक तरफा सेवा शर्त लागू होगा। लेकिन आप कुछ नहीं बोल सकते। और आज के बेरोजगारों के लिए नई विपत्ति यह होगी कि अब यहां रोजगार का चरित्र बदल जाएगा। यहां स्थायी के बदले कांट्रेक्ट पर कर्मी बहाल होंगे।

बैंक बचाओ-देश बचाओ में लोगों ने बैंक की राशि क्रोनी कैपिटलिस्ट द्वारा लूट लिये जाने, गरीब को सहायता देनेवाली योजनाओं की बंदी और स्थायी रोजगार के अवसर खत्म हो जाने की बातें कही हैं।

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