अदालत के आदेश की धज्जी उड़ा रहे हैं खुसरुपुर थानेदार, जब्त बाइक के एवज मांगी 5 हजार रिश्वत

ताकत के नशे में चूर पटना के खुशरुपुर थाना अध्यक्ष ने अदालत के आदेश के बावजूद जब्त मोटर साइकिल नहीं छोड़ कर अदालत की अवमानना ही नहीं कर रहे बल्कि बाइक मालिक से 5 हजार रुपये दिवाली गिफ्ट मांग रहे हैं.

विनायक विजेता

पटना के खशरुपुर थाना ने चंदन कुमार, पिता महेन्द्र सिंह की मोटर सायकिल को एसस्ीएसटी के किसी मामले पकड़ उसकी मोटरसायकिल थाने में जब्त कर ली। जिस संदर्भ में खुशरुपुर थाना में कांड संख्या- 175/17 अंकित किया गया।

 

पीड़ित के आवेदन पर पटना व्यवहार न्यायालय के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने पहले अपने पत्रांक-978 दिनांक 9 अक्टूबर 2017 को ही खुशरुपुर के थानाध्यक्ष को जब्त गाड़ी को छोड़ने का दिया पर लड़के के पिता द्वारा बार-बार थाना का चक्कर लगाने के बावजूद गाड़ी नहीं छोड़ी जा रही। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने पुनः १७ ओक्टुबर को खुशरुपुर थानाध्यक्ष को शोकाज भेजा पर थाना का इसपर कोई असर नहीं हुआ.  कागजात मुझे मेल पर भी भेजे। मामला सही पाकर कल यानी बुधवार को मैंने अपने मोबाइल से  खुशरुपुर थानाध्यक्ष को उनके सरकारी नंबर पर फोन कर अपना परिचय देते हुए उनसे कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बात की।

 

मेरा परिचय जानते ही उन्होंने मुझे कहा कि आप आदेश दें क्या करना है। तब मैंने उनसे कहा कि मैं आदेश देने वाला कौन होता हूं मैं आग्रह कर रहा हूं कि जब कोर्ट का आदेश है और आपके आइओ ने भी कोर्ट में यह लिखकर दिया है की गाड़ी के सारे कागजात वैद्य हैं तो आपसे आग्रह है की ‘फ्रेंडली पुलिस’ का धर्म निभाते हुए गाड़ी मुक्त करने की कृपा करें।

 

लड़के के पिता महेन्द्र सिंह द्वारा कल से अबतक थाने का कई चक्कर लगाने के बावजूद मोटरसायकिल नहीं छोड़ी जा रही। हमारे मित्र ने बताया कि थाना में पांच हजार रुपये दिपावली के खर्च के रुप में मांगे जो रहे हैं तब गाड़ी छोड़ने की बात कही जा रही है,जो वह व्यक्ति देने में सक्षम नहीं है।

एक तरफ पटना के जोनल आईजी, डीआईजी और एसएसपी से लेकर उनके मातहत अधिकारियों के काम, उनकी इमानदारी और कर्मठता की लगातार प्रशंसा हो रही है वहीं कुछ कनीय पुलिस पदाधिकारियों के ऐसे रुप और स्वरुप से पुलिस विभाग की बदनामी हो रही है।

 

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