पाकिस्तान के झूठ की बखिया उधेड़ने वाली IFS अफसर पॉलोमी त्रिपाठी का जानिए

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के झूठ की पोल खोल कर चर्चा में आने वाली आईएफएपस अफसर पॉलोमी त्रिपाठी को जानिये.
पालोमी ने न सिर्फ पाकिस्तानी झूठ की बखिया उधेड़ दी बल्कि उसे एक नया नाम दिया टेरोरिस्तान. उनके दमदार जवाब की सराहना सुषमा स्वराज समेत देश के अनेक लोगों ने की.
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के झूठ की पोल खोलने वाली आईएफएस पॉलोमी त्रिपाठी गोरखपुर शहर की बहू हैं। शहर के आजादनगर पूर्वीं  मोहल्ले में उनका घर है। उनके पति अरुण त्रिपाठी दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में भूगोल के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार मिथिलेश द्विवेदी ने उनके पॉलोमी और उनके परिवार के बारे में जानकारी एकत्र की है. आप भी पढ़ें.
इस मामले को लेकर दुनिया भर में बहू की हो रही तारीफ से त्रिपाठी परिवार बहुत खुश है।
अरुण के बड़े भाई पीडब्लूडी में वरिष्ठ कर्मचारी अश्वनी त्रिपाठी ने बताया कि यूएन में भारत के जवाब से पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है। पॉलोमी ने जो किया उससे पूरा परिवार बहुत खुश है।
यूएन मुद्दे पर सोशल मीडिया में भारतीय दल की खूब तारीफ हो रही है। कामयाबी टीम वर्क की है लेकिन पॉलोमी सामने हैं, ऐसे में उनकी प्रशंसा लाज़िमी है। पॉलोमी ने जेएनयू से एमए और एमफ़िल किया। वर्ष 2006 में वह आईआरएस के लिए चुनी गईं। 2007 में आईएफएस बनीं। मार्च में अरुण त्रिपाठी से उनका विवाह हुआ।
पॉलोमी इसी साल जून में यूएन गईं। मौजूदा ज़िम्मेदारी संभाले कुछ ही महीने हुए हैं। अरुण के बड़े भाई अश्विनी का कहना है कि पाकिस्तानी डिप्लोमेट पॉलोमी से बहुत सीनियर हैं मगर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और सैयद अकबरूद्दीन ने युवा पॉलोमी की निष्ठा व योग्यता को देखते हुए यूएन में जवाब देने के लिए उन्हें अधिकृत किया।
पॉलोमी इससे पहले चार साल साउथ ब्लॉक में डिप्टी सेक्रेटरी (प्रशासन) रह चुकी हैं। 2007 से 2009 के बीच वह अंडर ट्रेनी रहीं। 2009 से 2013 के बीच स्पेन में तैनाती रही। 2013-14 के बीच आसियान मल्टी लैटरल में उन्होंने अहम ज़िम्मेदारी संभाली। 2014 से मई -2017 तक एडमिनिस्ट्रेशन में रहीं। जून 2017 में यूएन पहुंचीं।
अश्विनी बताते हैं कि दो बच्चों की मां पॉलोमी को पढ़ना बहुत पसंद है। वह बिना पढ़े सोती नहीं हैं। किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं। हर जिम्मेदारी को समय ये पूरा करना उनकी हॉबी है। पति-पत्नी दोनों बेहद ईमानदार हैं। पॉलोमी के यूएन जाने के बाद अश्विनी की मां श्रीमती इंद्रपरी दिल्ली स्थित उनके आवास पर बेटे के साथ बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अश्विनी तीन भाइयों में बड़े हैं। उनके छोटे भाई प्रद्युम्न भारतीय रेवेन्यू सर्विसेज में हैं। मेरठ में एडीशनल कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। प्रद्युम्न की पत्नी पारमिता त्रिपाठी भी आईएफएस हैं।

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