झारखंड CM ने किया 2100 करोड़ के Konar project का उद्घाटन, 24 घंटे में निस्त नाबूद, सोरेन ने पूछा मखमल का था क्या ?

झारखंड CM ने किया 2100 करोड़ के Konar project का उद्घाटन, 24 घंटे में निस्त नाबूद, सोरेन ने पूछा मखमल का था क्या ?

झारखंड में भाजपा शासित सीएम रघुबर दास का अद्भुत राज है.एक दिन पहले उन्होंने 2100 करोड़ रुपये की Konar Irrigation Project को ताम-झाम के साथ उद्घाटन किया. दूसरे ही दिन बांध रेत की दीवार की तरह भरभरा कर गिर गयी.

अरबों रुपये की इस परियोजना का जो हस्र हुआ वह तो हुआ ही. किसानों की लाखों रुपये की खड़ी फसल तबाह हो गयी. इस बांध के ध्वस्त हो जाने के बाद राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारे में आपराधिक सन्नाटा पसरा है. कोई मुंह खोलने का साहस नहीं कर पा रहा. लेकिन अच्छी बात यह है कि बगोदर के भाजपा विधायक ने ही इस परियोजना पर गंभीर सवाल खड़ा करने का साहस जुटाया है. विधायक नागेंद्र महतो ने इसकी जांच करवाने की मांग कर डाली है.
शुरुआती जांच में झारखंड सरकार ने इसके लिए चूहों को जिम्मादार बता डाला. कहा गया कि रैट होल के कारण घटना हुई. प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने इस पर जोरदार चुटकी भी ली और हमला भी किया.

हेमंत ने किया हमला

सोरेन कहा तो “जाँच कर बेज़बान चूहों पर इल्ज़ाम थोप दिया गया. वाह रघुबर सरकार वाह. उद्घाटन के 12 घंटे के अंदर चूहों ने कुतर दी – डैम की दीवारें. मख़मल की थी क्या ?इस सरकार और इसके अफ़सरों ने जनता को बेवक़ूफ़ समझ लिया है की कोई भी पट्टी पढ़ा दो और हम समझ जाएँगे.”
इससे पहले सीएम रघुबर दास ने फेसबुक पर अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए लिखा था. गांव-गांव जाइए. हमारी योजनाओं को लोगों को बताइए.
अब सवाल उटेगा कि क्या उनके कार्यकर्ता लोगों को यही बतायेंगे कि सीएम ने जिस परियोजना का उद्घाटन किया वह महज 24 घंटे में स्वाहा हो गया ?
गिरिडीह के बगोदर थाना क्षेत्र के घोसको के पास कोनार सिंचाई परियोजना का नहर टूटी है. यह इलाका विधायक नागेंद्र महतो के क्षेत्र में ही पड़ता है.1995 में धनाभाव के कारण परियोजना रुक गयी. 2003 में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने फिर से शिलान्यास किया. लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा. फिर इस पर काम 2013 में शुरू हुआ. 2019 में मुख्यमंत्री रघुबर दास ने परियोजना पूरी होने के बाद उद्घाटन किया. किसानों को समर्पित किया. भाषण दिया और अपनी सरकार की पठी थपथपाई. उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री अपने आवास को लौटे. रात को सोये और  24 घंटे भी नहीं बीते की बांध के भरभरा कर ध्वस्त होने की खबर आ गयी.

Kona Irrigation Project का इतिहास

काबिले जिक्र है कि  कोनार सिचाई परियोजना की शुरुआत 1978 में संयुक्त बिहार में हुई थी. तब इस पर कुल 12 करोड की लागत थी. 1985 में इस परियोजना में दुर्घटना हुई.
गया. इसके चलते कई एकड़ धान और मकई के फसल बर्बाद हो गये. सीएम रघुवर दास ने एक दिन पहले ही हजारीबाग में इस परियोजना का उद्घाटन किया. कोनार सिंचाई परियोजना को पूरा होने में चार दशक लग गये. किसानों ने बताया कि रात में ही नहर का बांध टूट गया. इस वजह से कई एकड़ फसल बर्बाद हो गये. बगोदर के बीजेपी विधायक नागेन्द्र महतो ने इसको लेकर जांच की मांग की है.

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