कोशी के हजारों किसान लगानमुक्ति के लिए सड़क पर उतरने को तैयार

कोशी नव निर्माण मंच के बैनर तले किसानों ने बिहार सरकार से मांग की है कि इलाके के लाखों किसानों की जमीनों से लगानमुक्त किया जाये. किसानों ने प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि कोशी के किसानों के साथ ऐतिहासिक रूप से अन्याय किया गया है.

किसानों ने कहा कि  विकास के नाम पर हम लोगों को कुर्बानी दिलायी गयी| उसी समय हम लोगों के जमीनों के बदले जमीन मिलना अधिकार था जो मिलना तो दूर, उस खेत का मुआवजा भी नही मिला नदी तटबंधों के बीच कैद होकर खेतों को रेत में बदलती अनेक धाराओं में बहती रही हमलोग बसते उजड़ते रहे| हमलोगों को कोई देखने वाला नही इस अन्याय का सिलसिला यहीं खत्म नही होता हमलोगों की लगान और बिना सुविधाओं का सेस लिया जाता हैं| यह खत्म कर लगान मुक्ति के साथ जमीन का मालिकाना हक मिलना उस बर्बाद हो चुकी जमीन की क्षतिपूर्ति हमारा अधिकार हैं|

Ø  शुरू हो रहे मानसून सत्र में कोशी तटबंध के बीच के किसानों के लिए लगान मुक्ति कानून बनाए सरकार|

Ø  हजारों हजार आवेदन लेकर एतिहासिक अन्याय खत्म कर लगान मुक्ति कानून बनाने की मांग लेकर आये कोशी के किसान

उक्त बातें कोशी नव निर्माण मंच द्वारा युवा आवास में आयोजित प्रेस वार्ता में कोशी के किसानों ने कही| कोशी तटबन्ध के बीच के किसान अपने बालू भरे खेतों, नदी की बहती धाराओं की जमीन पर लगान व सेस को समाप्त कर जमीन का मालिकाना हक भूधारी किसान के पास रखने, व उनकी जमीन की हुई बर्बादी की क्षति देने सम्बन्धी कानून बनाने के साथ ही आर्थिक पुनर्वास औऱ कोशी की समस्या के निराकरण की पहल करने की मांग को लेकर कोशी नव निर्माण मंच के बैनर तले हजारो- हजार आवेदन मुख्यमंत्री के नाम बनाकर पटना आए है। शुरू हो रहे मानसून सत्र में कानून बनाने की मांग कर रहे हैं| इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री से अपने प्रतिनिधि मंडल से मिलने का समय भी मांगें है जो अभी नही मिला है।

किसानों का आंदोलन

प्रेस वार्ता में इंद्र नारायण सिंह, रामचंद्र यादव, सदरुल, ध्रुवनारायण राय, दुखी लाल, विकास, मुकेश, हरिनंदन कुमार ने अपने बसने और उजड़ने बर्बाद खेती की कहानियों और अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराया|
वहीं शहर के प्रमुख लोगों के साथ बातचीत भी हुई जिसमें पूर्व विधायक और किसान नेता राजाराम सिंह.  पर्यावरणविद रणजीव कुमार, प्रो0 वी एन विश्वकर्मा, वरिष्ट पत्रकार अमर नाथ झा, पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मणिलाल, सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार, उदयन राय, शशि कुमार, फैयाज, एडवोकेट कासिफ युनुस, मों इरफ़ान, इत्यादि ने अपनी बाते रखते हुए इस अभियान का समर्थन किया| कार्यक्रम का संचालन मंच के संस्थापक महेन्द्र यादव ने किया|

इन इन तटबंध के अंदर के गांवों से आवेदन लेकर आये हैं किसान –

सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड के बौराहा, सिमराहा, झकराही, सुकुमारपुर, पंचगछिया, बेलहा, खाप, परसाही, बेला गोठ, मानिकपुर, सिसवा, बेगमगंज, नौवाबाख्र्र, दुबियाही, मौजहाँ, गोढ़ीयारी निर्मली प्रखंड के कुनौली, रुपौली, धरहरा, कमलपुर , डगमरा, सिकरहटा, दिघिया, झुरा मौरा, बेला श्रृंगारमोती, लक्ष्मिनिया, पिपराही, मरौना प्रखंड के खोखनाहा, बेला, पीपरपाती, लक्ष्मिनिया, मन्ना टोला, बडहरा, जोबहाँ, मोरकियाही, तुलसियाही, मेनहा, घोघररिया, सिसौनी, सुपौल प्रखंड के बलवा, मंगुरार, डुमरिया, लालगंज, कदमटोल, नरैहिया, पिपराखुर्द, दभारी, रामपुर, नेमुआ, निर्मली, घुरन, मुहरनिया, सोकेला, घिवक, घुसकोल, बेलापरासमनी, मरीचा, गोपालपुर सिरे, सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के कोढ़ली, बहुअरवा, लौकहा, मधुबनी जिले के मधेपुर प्रखंड से बसीपट्टी , भवानीपुरपुर, गढ़गाँव, बक्सा, बेलचाही, रशुलगढ़, परियाही, गोबरगड्डा, मेनाही, लुचमन्नी, ग्वाल, सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड के शाहपुर, पहाड़पुर, केदली, असैय, हाटी बराही|

पटना में आंदोलन के समर्थन में मित्र मंडल (फ्रेंड ऑफ कोशी) का हुआ गठन।

आज कार्यक्रम में उपस्थित पटना शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने कोशी की समस्या को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों का समर्थन करते हुए इनके सवालों के साथ एकता कायम करते हुए अन्य प्रबुद्ध लोगों को साथ करने व अपने कपङे स्तर से मदद करने के लिए कोशी मित्र मण्डल (फ्रेंड्स ऑफ कोशी) का किया गठन किया। जिनमें रणजीव कुमार, विनोद, मणिलाल, अमर नाथ झा, फैयाज, उदयन शशि इत्यादि है।

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