कोसी त्रासदी के दस साल: वादे से मुकर गई नीतीश सरकार, 74% ध्वस्त घर नहीं बने

19 अगस्त, मधेपुरा| कोसी त्रासदी 2008, के तबाही व हृदय विदारक मंजर के गुजरे 10 वर्ष पूरा होने पर कोसी नव निर्माण मंच द्वारा अम्बेडकर कल्याण छात्रावास में संवाद कर्यक्र्म का आयोजन हुआ और मंच की पहल पर IPTA , AISF, भारत विद्यार्थी मोर्चा ने वी एन मंडल की प्रतिमा के समीप कालेज चौक पर मोमबत्ती जलाते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया| इन आयोजनों में नम आँखों ने त्रासदी के मृतकों को याद किया और भयावह तबाही के बाद राहत पुनर्वास में में राज्य सरकार के झूठे आकड़े को बेनकाब किया गया|

विश्व बैंक से लोन मिलने के बाद भी पूरा नही हुआ पुनर्वास कार्य

इन आयोजनों में वक्ताओं ने बताया कि कोसी त्रासदी के पीड़ितों के लिए विश्व बैंक से दो बार कर्ज लिए गये फिर भी सरकार द्वारा पूर्ण क्षतिग्रस्त घरों की संख्या के 26% घर बनाकर ही सूबे के मुख्यमंत्री ने घर बनाने की योजन बंद करा दी और जन सभाओं में पहले से बेहतर कोसी के निर्माण कर देने का दावा कर दिया|

 इतना ही इस राष्ट्रीय आपदा के जांच के लिए बनी न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट पर किसी को दंडित भी नही किया गया। यह कोशीवासियों के साथ मजाक है। इसके लिए मुख्यमंत्री को कोशीवासियों से माफ़ी मांगनी चाहिए। 

 470 million डॉलर के लोन के बाद भी कोसी त्रासदी का दर्द कम नही

इस कोसी त्रासदी के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यो के लिए BIHAR KOSI FLOOD RECOVERY PROJECT नाम से 220 मिलियन अमेरीकी डालर का WORLD BANK से कर्ज बिहार सरकार ने ली, पुनः KOSI BASIN DEVELOPMENT PROJECT नाम से 250 मिलियन अमेरिकी डालर का लोन आया | इन दो बार के विश्व बैंक से कर्ज के बावजूद आज भी कोसी वासियों के दर्द कम नही हुए हैं| सरकार की KOSI FLOOD NEEDS AND ASSESSMENT REPORT ही कहती हैं कि 2,36,632 घर इस आपदा में पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए| परन्तु आज तक 62,000 लगभग घर ही बन पाया हैं, जो कुल के लगभग 26% हैं|

मृतकों और लापता के परिजनों को नही मिल सकता पर्याप्त अनुदान

वक्ताओं ने कहा हैं की मधेपुरा में उस वक्त CRF के फार्म 9 में 92343 घर पूर्ण रुप से ध्वस्त होने का उल्लेख हैं उसके अलावे नगर निकायों मुरलीगंज और मधेपुरा में 3672 घर पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए थे| इनकी क्षति के लिए वितरित होने राशि में भी 43,69,97,000 की अर्थात 85% राशि वितरित नही की गयी जबकि इसके अलावे आंशिक क्षति वाले 33,447 लोगों के घर ध्वस्त हुए थे| इसी प्रकार अन्य क्षतिपूर्ति की स्थिति हैं| आज भी 2008 के बाढ़ में मृतक अनेक लोग अनुग्रह अनुदान के लिए भटक रहे हैं| तो उस बाढ़ के लापता दर्ज लोगों को कौन पूछता हैं जिनकी संख्या 3500 सरकारी आकड़ों में दर्ज हैं|

उसी प्रकार पुनर्वास के बनी चार चरणों योजना में मात्र दो चरण के लिए 28,000 घर बनाने की योजना शुरू हुई| जिसे अब समाप्त कर दिया गया जबकि दूसरा चरण भी पूरा नही हो पाया हैं| CRF के फार्म 9 की सूचि के 64,343 घर, नगर निकायों के 3,672 कुल 68,015 वंचित रह गये और आंशिक क्षति के घरों 33,447 को जोड़ दें कुल 1,01,462 लोग वंचित रह गये|

मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नही और दावा बेहतर कोसी बनाने का

पिछले वर्ष आयी बाढ़ ने सरकार के बाढ़ के खतरों को कम करने और दीर्घकालीन योजना बनाने की पोल खोल दी हैं| पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील कोसी अंचल में आपदाओं का अनेको बार सामना करते किसानों को आज भी न्यूनतम समर्थन मूल्य नही मिल पाता हैं न ही कोसी क्षेत्र में नगदी फसल के रूप में मक्के के क्रय की कोई सरकारी व्यवस्था हो पायी हैं| पलायन तो बदस्तूर जारी हैं| पलायन रोकने वाली योजनाये आज भी धरातल पर नही उतरी हैं| कुछ ठेकेदारी पर आधारित कार्य जरुर हुए हैं, बीरपुर में भव्य भवन बना है, अफसरशाही और बड़े ठेकेदारों के चश्में से देखते हुए राज्य के मुखिया ने दावा किया है कि पहले से बेहतर कोसी हमने बना दिया है।

आपदाओं से ग्रस्त कोसी की समस्या के दीर्घकालिक हल निकाला जाय

कोसी नव निर्माण मंच मुख्यमंत्री से अपने झूठे घोषणा पर माफ़ी मांगने की मांग उठाते हुए कहा की यदि तनिक भी नैतिकता हैं तो सभी पीड़ितों को पुनर्वासित कराया जाय और कोसी त्रासदी के जाँच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों को दंडित करें, कोसी क्षेत्र में निर्मित होने वाली अधोसंरचनाओं में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था किया जाय| क्षतिपूर्ति नही देने वाले कर्मियों, भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाय| आपदाओं से ग्रस्त कोसी की समस्या के दीर्घकालिक हल निकाला जाय| 2017 के बाढ़ पीड़ितों की सहायता राशि का वितरण कराया जाय| यहाँ के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की गारंटी सरकार करे| मक्के के सरकारी खरीद की व्यवस्था हो| पलायन कर रहे लोगों के लिए सरकारी योजनाओं कोई धरातल पर उतरा जाये।

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श्रद्धांजलि सभा में IPTA के मुख्य संरक्षक प्रो० श्यामल बाबु, प्रो० भूपेन्द्र मधेपुरी, प्रो० अलोक, IPTA के प्रदेश संयुक्त सचिव सुभाष चन्द्र, AISF के वसीम, तुरबशु, आनन्द कुमार कोसी नव निर्माण मंच के संदीप, राजेश रजनीश, भारत विद्यार्थी मोर्चा के मुन्ना समेत अनेक लोग शामिल हुए। वही विमर्श में प्रभात कुमार भारती, रमन जी, शम्भू यादव, माधव साह, मनोज, अजय, चन्दन, पंकज, सुमन कुमार, रणधीर, सहित अनेक लोगों ने बात रखी। कार्यक्रम का संचालन महेंद्र यादव ने किया|

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