क्या 2025 में तेजस्वी की राह में रोड़ा अटकाएंगे कुशवाहा

क्या 2025 में तेजस्वी की राह में रोड़ा अटकाएंगे कुशवाहा

सिर्फ दो साल पहले बिहार विस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने पांच दलों का मोर्चा बनाया था। वे खुद मुख्यमंत्री पद के घोषित दावेदार थे। अब क्या करेंगे?

कुमार अनिल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि 2025 में महागठबंधन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा। वे ही मुख्यमंत्री पद के चेहरा होंगे। महागठबंधन में कई बड़े नेता हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद के दावेदार कोई कभी नहीं रहे। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह हों या राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह, दोनों बड़े नेता हैं, पर कभी सीएम पद के दावेदार नहीं रहे। महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं। अब उनकी रणनीति क्या होगी?

उपेंद्र कुशवाहा एकमात्र नेता हैं, जो लंबे समय समय से मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं। दो साल पहले बिहार विधान सभा चुनाव में उन्होंने एमआईएम और बसपा सहित पांच दलों के साथ मोर्चा बनाया था। तब उनकी पार्टी रालोसपा थी। रालोसपा ने प्रदेश में 130 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उनका एक भी प्रत्याशी जीत नहीं सका था। उनका वोट प्रतिशत भी 2015 के मुकाबले काफी घट गया था। उन्हें सिर्फ 1.77 प्रतिशत वोट मिला। कुशवाहा बहुल सीटों पर भी वे तीसरे नंबर रहे। बिहार में एक भी सीट पर रालोसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर नहीं आया।

अब बिहार की राजनीति को नीतीश कुमार ने अपनी तरफ से तय कर दिया है। तेजस्वी मुख्यमंत्री के चेहरा होंगे, तो स्पष्ट है कि 2025 का चुनाव महागठबंधन और भाजपा के बीच होगा।

तो क्या उपेंद्र कुशवाहा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा मान लेंगे और जदयू में ही रहेंगे या वे जदयू छोड़ कर भाजपा में जाएंगे या फिर से रालोसपा जैसी कोई नई पार्टी बनाएंगे?

यह तो स्पष्ट है कि उपेंद्र कुशवाहा बिहार के कुशवाहा के चर्चित नेता हैं, पर ऐसे नेता नहीं हैं, जो अपने समाज के बड़े हिस्से का समर्थन हासिल कर सकें। इसलिए एक संभावना यह है कि वे तेजस्वी को नेता मान कर खुद उपमुख्यमंत्री जैसा पद हासिल करने की कोशिश करें। दूसरी संभावना यह है कि वे फिर से नई पार्टी बनाएं और भाजपा सा तालमेल करें। लेकिन यहां भी उन्हें मुख्यमंत्री पद की दावेदारी तो छोड़नी ही पड़ेगी। तीसरी संभावना यह है कि वे सीधे भाजपा में शामिल हो जाएं और केंद्र में मंत्री बने। भाजपा में शामिल होने पर भी उन्हें मुख्यमंत्री की दावेदारी तो छोड़नी ही पड़ेेगी।

अब देखना है कि उपेंद्र कुशवाहा क्या करते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जब से नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है, कुशवाहा ने कोई ट्वीट नहीं किया है। बदलती राजनीति पर वे मौन हैं।

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