क्या JDU में दो कुशवाहों के बीच ठन गई?

क्या JDU में दो कुशवाहों के बीच ठन गई?

JDU में पद के हिसाब से उपेंद्र कुशवाहा तीसरे सबसे बड़े नेता है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा हैं। ऐसे दो प्रमाण हैं, जिनसे स्पष्ट है कि दोनों में ठन गई है।

कुमार अनिल

उपेंद्र कुशवाहा जदयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे पद के हिसाब से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के बाद तीसरे बड़े नेता हैं। आज उपेंद्र कुशवाहा की बिहार यात्रा शुरू हुई। उनकी यात्रा चंपारण से शुरू हुई है, जहां से प्रायः मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी यात्राएं शुरू करते रहे हैं। पार्टी के हिसाब से देखें, तो यह उसका बड़ा कार्यक्रम है।

उपेंद्र कुशवाहा आज चंपारण में लोगों से, कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। जदयू में आने के बाद उपेंद्र कुशवाहा का यह पहला बड़ा कार्यक्रम है। कायदे से उनकी इस यात्रा में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को भी साथ होना चाहिए था। कम से कम पहले दिन तो जरूर साथ होना चाहिए था, आखिर वे प्रदेश अध्यक्ष हैं। लेकिन साथ रहना तो दूर उपेंद्र कुशवाहा की यात्रा शुरू होने पर शुभकामना तक नहीं दी। और तो और उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी यात्रा के कई फोटे ट्वीट किए हैं, इन फोटो को उमेश कुशवाहा ने लाइक तक नहीं किया है।

एक बात और भी गौर करनेवाली है। जदयू का जो आधिकारिक ट्विटर हैंडल है, वहां प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के कई फोटो हैं, जिनमें वे प्रवक्ताओं से बात कर रहे हैं, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा की यात्रा का एक भी फोटो नहीं है।

कायदा यही है कि पार्टी के प्रमुख नेता कोई ट्वीट करते हैं, तो संगठन का ट्विटर हैंडल रिट्वीट करता है, लेकिन जदयू के ट्विटर हैंडल से उपेंद्र कुशवाहा के ट्वीट को रिट्वीट नहीं किया गया है।

हां, रोचक बात यह है कि JDU_RLSP India और JDU_RLSP Bihar ट्विटर हैंडल से उपेंद्र कुशवाहा की चंपारण यात्रा के फोटो ट्वीट किए गए हैं। एक नहीं, अनके। इन दोनों ट्विटर हैंडल पर उपेंद्र कुशवाहा के लोगों से मिलते, बात करते कई वीडियो भी हैं।

संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के बीच ठन गई है, इसका दूसरा प्रमाण यह है कि उपेंद्र कुशवाहा की चंपारण यात्रा से दो दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष ने बयान दिया कि पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की वैकेंसी नहीं है। यह एक कुशवाहा की यात्रा से पहले दूसरे कुशवाहा के छींकने जैसा मामला है। मालूम हो कि जब से यह खबर आई कि राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह केंद्र में मंत्री बनेंगे, तभी से यह चर्चा होने लगी थी कि उपेंद्र कुशवाहा राश्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। उमेश कुशवाहा का बयान सीधा-सीधा उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ ही था, क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए हवा में किसी दूसरे का नाम नहीं था।

अगर उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं, तो प्रदेश अध्यक्ष के पद पर उमेश कुशवाहा का रहना सामाजिक समीकरण के हिसाब से अनुचित होगा। पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पदों पर एक ही बिरादरी के नेता का होना कहीं से उचित नहीं होगा।

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खैर, जो हो, पर इतना तय है कि जदयू के ये दोनों नेता एक ही कुशवाहा बिरादरी से आते हैं और दोनों में ठन जाना स्वाभाविक है।

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