लाख रुपए किलोवाली सब्जी की खेती का प्रचार फेक निकला

लाख रुपए किलोवाली सब्जी की खेती का प्रचार फेक निकला

कल नीतीश केयर्स ने खबर ट्विट की, जिसमें दावा था कि बिहार में लाख रुपए किलोवाली सब्जी की खेती हो रही है। खबर फेक निकली, फिर भी जदयू ने इसे डिलीट नहीं किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों का प्रचार करने का दावा करनेवाले ट्विटर हैंडल नीतीश केयर्स @NitishCares ने एक खबर ट्विट की। इसमें कहा गया था कि देश में सिर्फ बिहार में ही हॉप शूट्स की खेती हो रही है, जिसकी कीमत 80 हजार से एक लाख रुपए किलो है। इस खबर वाले वीडियो को जदयू ने रिट्विट किया। इस सब्जी से शराब बनती है, इसीलिए यह इतनी महंगी है।

कल नौकरशाही डॉट कॉम ने शराब बनानेवाली सब्जी के उत्पादन के प्रचार पर सवाल खड़ा किया था। जिस प्रदेश में शराबबंदी है, उस प्रदेश के सत्ताधारी दल शराब बनानेवाली सब्जी उगाने के लिए किसानों को प्रेरित कैसे कर रहे हैं। क्या यह वैध और उचित है?

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आज पटना से प्रकाशित दैनिक जागरण ने अपनी पड़ताल से ऐसी खेती को फर्जी खबर साबित कर दिया। अखबार लिखता है कि औरंगाबाद के नवीनगर के करमडीह गांव के अमरेश सिंह ने ऐसी खेती करने का दावा किया था। जब उसके गांव में पड़ताल की गई, तो लोगों ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। अमरेश ने कहा कि उसने खेती की थी, लेकिन वह बीमार हो गया, इसलिए फसल सूख गई।

सवाल यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों के प्रचार के लिए बना नीतीश केयर्स क्या ऐसी झूठी खबरों से बिहार में बहार साबित करना चाहता है। अभी कुछ दिनों पहले कोलकाता के अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन छपे, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ एक महिला की तस्वीर थी। महिला कह रही थी कि पीएम मोदी के कारण उसे सिर पर छत मिली। उसकी तरह लाखों महिलाओं को घर मिले हैं। जब वहां मीडिया पहुंचा, तो मालूम हुआ कि वह किराये के मकान में रहती है। कब उसकी तस्वीर खींची गई उसे पता ही नहीं चला।

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