फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए मशीन के लिए 80 फीसदी अनुदान देगी सरकार

सरकार फसल अवशेषों को खेत में जलाने की बजाय उसका प्रबंधन और खाद के रूप में उपयोग करने के उद्देश्य से मशीनों की खरीद पर 80 प्रतिशत अनुदान दे रही है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विधान सभा में बताया कि राज्य के नवादा, औरंगाबाद और गया जिले में धान और गेहूं की कटाई हार्वेस्टर मशीन से करने के बाद फसल अवशेष (खूंटी) को खेतों में जलाने की घटनाएं सामने आई हैं।

  इसके कारण फसल उत्पादन में होने वाले नुकसान और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के संबंध में किसानों को जागरूक करने के लिए संबंधित जिलों के जिला कृषि पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, कृषि सलाहकार और कृषि समन्वयक को निर्देश दिया गया है। उपमुख्‍यमंत्री ने कहा कि इसके साथ ही प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर आयोजित शिविर एवं किसान चौपाल में किसानों को पराली जलाने के संबंध में तथा इससे होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी गई है। फसल अवशेषों को खेत में जलाने के बदले उसका प्रबंधन करने और खाद के रूप में उपयोग करने के उद्देश्य से राज्य सरकार की योजना के तहत हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ बेलर और रोटरी मल्चर आदि मशीनों पर 80प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
एक अन्‍य सवाल के जवाब में शहरी विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि जल संरक्षण के लिए लघु एवं दीर्घकालीन नीति पर काफी गंभीरता से काम कर रही है। विधान सभा में उन्‍होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य में भूमिगल-जल स्तर के नीचे चले जाने से जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसके मद्देनजर सरकार जल संरक्षण के लिए लघु एवं दीर्घकालीन नीति तैयार की है। उन्होंने बताया कि लघु नीति के तहत सरकार ने सभी नगर निकायों में प्रत्येक दो वार्ड पर एक स्टेनलेस स्टील वाटर टैंकर खरीदने का निर्देश दिया है। वहीं, नगर निकायों के प्रत्येक वार्ड में अधिकतम दो सबमर्सिबल पंप लगाने के लिए विभाग ने स्वीकृत मॉडल प्राक्कलन एवं मार्गदर्शिका जारी की है। मंत्री ने बताया कि जल संरक्षण की दीर्घकालीन नीति के तहत राज्य के सभी नगर निकाय के तालाबों और पोखरों की उड़ाही एवं वृक्षारोपण कार्य योजना का प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। शिक्षामंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में विद्यालयों को उत्क्रमित किया जा रहा है, जिसके कारण शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी। इसे देखते हुए बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। उधर विधान परिषद में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान अभी जिस भवन में संचालित हो रहा है, उसे नए भवन में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां मॉड्यूलर शल्य चिकित्सा कक्ष (ओटी) समेत सभी तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। नए उपकरणों की खरीद के लिए निविदा आमंत्रित की गई है। उन्होंने कहा कि संस्थान के निदेशक को खराब पड़े मशीनों की मरम्मत तत्काल कराने के लिए निर्देश दिया गया है। संस्थान में इलाज के लिए आए मरीजों को जरूरत के अनुसार ट्रेडमिल टेस्ट समय पर ही किया जाता है।

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