शराबबंदी पर नरम हुए नीतीश, चुनावी सीजन में इस कानून में संशोधन की तैयारी

दो वर्ष पूर्व शराबबंदी कानून को लागू करने के पहले सरकार ने काफी माथपच्ची किया था. इसके तहत सजा के प्रावधान पर काफी विवाद भी हुआ था. लेकिन तब सरकार टस से मस नहीं हुई थी. पर अब मुख्यमंत्री ने इशारा दिया है कि इस कानून की समीक्षा होगी.

नीतीश कुमर ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर इस कानून में संशोधन भी किया जायेगा. मंगलवार को  सम्पूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर युवा संकल्प सभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि शराबबंदी कानून के सहारे कुछ लोग तरह-तरह का खेल कर रहे हैं. ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि लोगों को फंसाया जा रहा है. हम जल्द ही इस कानून की समीक्षा करेंगे. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जरूरत होगी तो इसमें संशोधन भी किया जाएगा.कानून में कमियों का सरकारी तंत्र में बैठे लोग भी लाभ उठाने लगते हैं. हम ऐसा होने नहीं देंगे.

 

गौरतलब है कि विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस कानून के नाजाजय इस्तेमाल से थानेदार करोड़पति बन गये हैं. वहीं इस कानून के तहत एक लाख से ज्यादा लोग जेलों में बंद हैं इनमें अधिकतर लोग दलित व पिछड़े समुदाय से हैं जबकि बड़े सप्लायरों को पुलिस पैसे के बल पर छोड़ देती है.  एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की जेलों में एक लाख से ज्यादा लोग बंद हैं. इनमें ईबीसी व दलित वर्ग के लोग ज्यादा हैं.

पिछले दिनों राजद ने घोषणा की थी कि उसकी सरकार बनते ही गरीबों को जेल से निकालने का प्रावधान किया जायेगा.  इधर नीतीश कुमार ने इतनी बड़ी संख्या जेल में बंद होने के राजनीतिक नफा नुकसान को भी देखने लगे होंगे. इसलिए उन्होंने इस कानून में संशोधन की बात कर रहे हैं.

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब हमने शराबबंदी की घोषणा की, तब हमारे खिलाफ क्या-क्या नहीं बोला गया। अब भी दुष्प्रचार किया जाता है कि शराबबंदी की वजह से एससी-एसटी, ओबीसी और ईबीसी के गरीब जेल जा रहे हैं. ऐसा कहने वाले पहले यह तो बताएं कि दूसरे अपराधों में किस-किस जाति के लोग जेल में हैं. शराबबंदी का सबसे अधिक फायदा गरीब और गांवों में रहने वालों को हुआ है। यही बात विरोधियों को पसंद नहीं है. खैर, कुछ बड़ा करने पर ‘भुगतने’ के लिए तैयार रहना चाहिए.और, हम तैयार रहते हैं.

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