‘कन्हैया कुमार उदारवादी ब्रह्मणवाद के मुखौटे में छिपा बहुजनों का सबसे बड़ा शत्रु’

कन्हैया कुमार उदारवादी ब्रह्मणवाद के मुखौटे में छिपा बहुजनों का सबसे बड़ा शत्रु 

 बेगूसराय से सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार उदारवादी ब्रह्मणवाद के मुखौटे में छिपा ऐसा चेहरा हैं जो बहुजनवाद व आरक्षण विरोध के लिए मनुवदी मीडिया द्वार क्रियेट किये गये हैं. कन्हैया वामपंथी राजनीति की डूबती नैया को बचाने के लिए लाल सलाम के साथ नील सलाम का नारा देकर बहुजनों की पीठ में छुरी घोंपने की सियासत कर रहे हैं.पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व नागपुर से लोकसभा प्रत्याशी डॉ. मनीषा बांगर ने अपने बयान में यह बातें कहीं.

 

उन्होंने बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र के बहुज मतदाताओं का आह्वान किया कि वे कन्हैया के बहकावे में ना आयें. उन्होंने कहा कि आरएसएस की यही रणनीति है कि जब उसे अपने पतन का खतरा दिखने लगता है तो वह उदारवादी ब्रह्मणवाद के मुखौटे वाले व्यक्ति को प्रोजेक्ट कर देता है ताकि बहुजन एकता को छिन्न-भिन्न किया जा सके.

 

आरएसएस व मनुवादी मीडिया के क्रियेशन हैं कन्हैया

डॉ. मनीषा ने अपने बयान में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस के खिलाफ बहुजनों के आंदोलन को हाइजेक करने के लिए आरएसएस और मनवादी मीडिया ने कन्हैया को क्रिएट किया. उन्होंने बहुजनों को आगाह करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी हाल में मनुवाद के इस उदारवादी चेहरे के ट्रैप में नहीं आना चाहिए.

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डॉ. मनीषा ने इतिहास का उद्वरण देते हुए कहा कि वामपंथियों ने अम्बेडरवाद को हर संभव क्षति पहुंचाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जब बाबा साहब भीम राव अम्बेडर चुनाव लड़ रहे थे तो ये कम्युनिस्ट ही थे जिन्होंने जनता से अपील की थी कि वे अपना वोट खराब कर दें लेकिन अम्बेडर को जीतने ना दें.

साम्प्रदायिक गिरिराज ने किया रास्ता साफ

डॉ. मनीषा ने अपने बयान में कहा कि भाजपा के बेगूसराय से बहुजन विरोधी व साम्प्रदायिक प्रत्याशी  गिरिराज सिंह ने कन्हैया का रास्ता साफ करने के लिए ही बेगूसराय से चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर दिया था. बहुजनों को भूमिहार ब्रह्मणों के इस षड्यंत्र को समझने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भूमिहार गिरिराज सिंह की यह सोची समझी जातिवादी सोच ही थी कि उसने वामपंथी भूमिहार के पक्ष में पूरी तरह फिजा बना देने के बाद भारी मन से वहां से चुनाव लड़ने पहुंच गये.

 

मनीषा बांगर ने बिहार विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के उस फैसले की सराहना की जिसके तहत उन्होंने बेगूसराय सीट पर सीपीआई के प्रत्याशी कन्हैया कुमार को समर्थन देने से इनकार कर दिया.

 

मनीषा बांगर ने एससी, एसटी, ओबीसी व अल्पसंख्यक समाज समेत तमाम बहुजनों से अपील की कि वे भूल कर भी कम्युनिस्टों के झांसे में ना आयें.

 

 

One comment

  1. कृष्ण देव

    इस बात की क्या गारंटी है कि मनीषा जी ख़ुद संघ के नोटों तले दबी छद्म बहुजन प्रेमी नहीं हैं…?

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