विक्षिप्त MODI की भाजपा में हैसियत जदयू के RCP से भी बदतर

विक्षिप्त MODI की भाजपा में हैसियत जदयू के RCP से भी बदतर

राजद का भाजपा के सुशील मोदी पर जबरदस्त हमला। कहा, विक्षिप्त MODI की भाजपा में हैसियत जदयू के RCP से भी बदतर हो गई। RJD ने ऐसा क्यों कहा?

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि पूर्व उप मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी को बहुत उम्मीद थी कि उन्हें केंद्र में मंत्री-पद मिलेगा। मंत्री-पद तो दूर की बात है, हलात यह है कि उन्हें कोई पूछ ही नहीं रहा। उनके पास बस एक ही पूंजी है, वह लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव की रोज निंदा करना। उनकी इस पूंजी का भाजपा में अब कोई मोल नहीं रहा। उनकी हालत आज जदयू के आरसीपी सिंह से भी बदतर हो गई है। आरसीपी सिंह की जदयू में अब भी पूछ हो रही है, उनका शीर्ष नेतृत्व बात तो कर रहा है, लेकिन सुशील मोदी को कोई पूछनेवाला नहीं। उनके सपने टूट गए हैं और वे विक्षिप्त हालत में हैं।

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा, भाजपा नेता सुशील मोदी द्वारा राजद पर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी ही पार्टी में उपेक्षा का दंश झेल रहे सुशील मोदी जी का माइंडसेट गड़बड़ा गया है, इसलिए दूसरों के नाम पर अपनी झुंझलाहट उतार कर संतोष कर रहे हैं।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि लालू परिवार की आलोचना के अलावा इनके पास और कोई पूँजी नही है और उसी की मार्केटिंग कर वे वर्षों तक बिहार का उप-मुख्यमंत्री बने रहे। वे भाजपा के कोर वोटरों का ही पर कतरते रहे। बड़े बेआबरू के साथ उप-मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद प्रायोजित ढंग से प्रचारित किया गया कि वे केन्द्र में मंत्री बनेंगे, पर निराश होना पड़ा। जिसका खीझ वे राजद नेताओं के नाम पर उतार रहे हैं। राजद नेता जगदानन्द सिंह और शिवानन्द तिवारी के बहाने सुशील मोदी जी को अपने भविष्य की चिन्ता सता रही है।

राजद प्रवक्ता ने कहा भाजपा के सिमटते जनाधार का एक महत्वपूर्ण कारक सुशील मोदी को मानते हुए भाजपा में इन्हें अब कोई तरजीह नहीं दिया जाता जिससे अपनी झुंझलाहट वे राजद पर उतारते रहते हैं। राजद नेता ने कहा कि राजद को मोदी जैसे विक्षिप्त मानसिकता वाले लोगों से सर्टीफिकेट लेने की जरूरत नहीं है । ऐसे उनके बयानों को कोई अब तरजीह भी नहीं दिया जाता। उनका दायरा अब प्रेस-बयान और ट्विटर तक ही सिमट गया है। जिस राज्यसभा के वे सदस्य हैं उसी राज्यसभा में होने वाले इस द्विवार्षिक चुनाव के बाद राजद के छह सदस्यों में दो मुसलमान, एक यादव , एक ब्राह्मण, एक भूमिहार और एक वैश्य समाज के हो जायेंगे । इसके बाद भी यदि किसी को केवल एमवाई दिखाई पड़ रहा है तो निश्चित से उसका माइंडसेट गड़बड़ा गया है।

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