महिला पर वार करनेवाले नेताओं से ही बनी है मोदी सरकार

महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर बहस और नारे चाहे जितने उत्तेजित हों, लेकिन महिला पर वार करनेवाले नेताओं की संख्या सबसे अधिक भाजपा में ही है. बहुत हुआ महिला पर वार अबकी बार मोदी सरकार का नारा देनेवाली भाजपा ने सबसे अधिक ऐसे उम्मीदवार खड़े किये जिनपर महिला को प्रताडि़त करने का आरोप लगा हुआ है. गति और प्रगति में खुद को आगे बतानेवाला महाराष्ट्र महिला पर वार करनेवाले नेताओं को चुनने में भी सबसे आगे हैं.

पटना : महिला अपराध को चुनाव में मुद्दा बनानेवाले ही महिला पर अपराध करने को उम्मीदवार बनाते रहे. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म और नेशनल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भाजपा में ऐसे सांसदों व विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा है जिनपर महिलाओं ने विभिन्न प्रकार से प्रताडि़त करने का आरोप लगाया हुआ है.
उल्लेखनीय है कि यह रिपोर्ट तब आयी है जब भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के ऊपर एक नाबालिग के साथ बलात्कार का आरोप लग रहा है और कठुआ गैंगरेप की वारदात के बाद पूरे देश में इस पर चर्चा हो रही है. वर्तमान सांसदों व विधायकों के 4896 में से 4845 मामलों का विश्लेषण करने के बाद जो तथ्य रिपोर्ट के माध्यम से सामने आये हैं वो चौंकानेवाले हैं. इन 4845 में से 1580 सांसदों व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. उनमें से 48 के खिलाफ महिला को प्रताडि़त करने के मामले दर्ज हैं. 48 जनप्रतिनिधियों में से भाजपा के सबसे अधिक 12 हैं, जबकि शिवसेना के 7 और टीएमसी के 6 सांसदों व विधायकों के खिलाफ महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.
रिपोर्ट के आंकड़ों से साफ होता है कि पिछले पांच वर्षों में भाजपा ने 47 ऐसे उम्मीदवारों को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिन पर महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों का आरोप था. बसपा ने ऐसे 35 उम्मीदवारों और कांग्रेस ने 24 उम्मीदवारों को टिकट दिया.
राज्यवार अगर देखा जाये तो बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे पिछड़े राज्यों के मुकाबले महाराष्ट्र और बंगाल जैसे राज्यों में महिला पर अपराध करने का मुकदमा झेल रहे नेताओं की सदन में मौजूदगी सबसे अधिक है. महाराष्ट्र 12 सांसदों व विधायकों के साथ सबसे आगे है. उसके बाद पश्चिम बंगाल फिर ओडिशा व आंध्र प्रदेश का स्थान आता है. महिलाओं के खिलाफ किये गये इन अपराधों में महिलाओं की अस्मिता को नुकसान पहुंचाने, अपहरण व ज़़बरदस्ती शादी करने के मामले दर्ज हैं. एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि जिन उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आरोप हैं, उन्हें चुनाव लडऩे से रोकना चाहिए और राजनीतिक पार्टियों को ये बताना चाहिए कि वो किस आधार पर उम्मीदवारों को टिकट दे रही हैं.

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