मोदी स्टाइल में नीतीश, आनंद मोहन के यहां छापे पर सवाल

मोदी स्टाइल में नीतीश, आनंद मोहन के यहां छापे पर सवाल

न्यू इंडिया में शासन की नई शैली विकसित हुई है। विरोधियों पर छापे मारो, डराओ। तेजस्वी यादव ने जेल में आनंद मोहन के वार्ड में छापे पर कहीं दो खास बातें।

बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्व यादव ने आज विशेष संवाददाता सम्मेलन में पूर्व सांसद आनंद मोहन के सहरसा जेल वार्ड में छापे पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आनंद मोहन का परिवार राजद के साथ है, इसलिए उन्हें डराने के लिए छापा मारा गया। छापे का तात्कालिक मकसद बिहार में हो रहे दो क्षेत्रों में उपचुनाव को प्रभावित करना प्रमुख था। उनके वार्ड में चुनाव से एक सप्ताह पहले 23 अक्टूबर को छापा मारा गया।

छापा मारने गई टीम में 15-20 लोग थे। छापा रात में मारा गया। छापा मारनेवाले पुलिसकर्मी सभी हेलमेट पहने थे। हेलमेट पहन कर जेल में पुलिस छापा नहीं मारती। खुद आनंद मोहन ने पत्र लिखकर उन सभी के पुलिसकर्मी होने पर संदेह जताया है।

कारा महानिरीक्षक को लिखे पत्र में आनंद मोहन ने बताया है कि प्रशासन का कहना है कि उनके वार्ड से मोबाइल मिला है। पूर्व सांसद ने सवाल उठाया कि छापेमारी की वीडियोग्राफी क्यों नहीं कराई गई। छापा मारनेवाले सभी लोगों के पास मोबाइल था। मोबाइल की रोशनी में ही छापा मारा गया। मोबाइल लेकर वे छापा मारने कैसे आए। तलाशी के दौरान प्रशासन के कोई भी वरिष्ठ अधिकारी क्यों नहीं थे, जबकि ऐसा करना जरूरी था।

आनंद मोहन ने दो पन्ने के पत्र में यह भी पूछा है कि अगर मेरे वार्ड से मोबाइल बरामद हुआ, तो किसने जब्त किया-एसपी, डीएसपी कौन? मोबाइल बरामद होने का मुकदमा एक दिन बाद छुट्टी से लौटे जेल अधीक्षक ने क्यों किया, जबकि वे छापेमारी में नहीं थे।

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि उपचुनाव में जीत के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हर तिकड़म किया। साड़ी बंटवाई। शराब बंटवाई। और आनंद मोहन व उनके परिवार को डराने की कोशिश की। आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद शिवहर से राजद विधायक हैं।

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