मोहम्मद बिन सलमान के दबाव में पाकिस्तान पर नरम पड़ जायेंगे मोदी?

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की भारत यात्रा क्या हमारे देश के लिए नाउम्मीदी बढ़ाने वाली रही. क्या मोहम्मद बिन सलमान ने जिन्हें पश्चिमी जगत एमबीएस के नाम से जानता है, हमारी उम्मीदों पर पानी फेर गये.

mohammad bin salman with Narendra modi

यह याद रखने की बात है कि भारत आगमन से एक दिन पहले एमबीएस ने पाकिस्तान की यात्रा की थी. जहां उन्होंने पाकिस्तान को दिल खोल कर मदद की. 20 बीलियन डालर की. इमरान खान ने उनके आवभगत में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया उन पर.और इसका उन्हें लाभ भी मिला.

पाकिस्तान पर नरम हुए मोदी

मगर भारत में आ कर एमबीएस ने कुछ ट्रेड समझौते तो जरूर किये पर आतंकवाद के मामले पर पाकिस्तान का नाम तक ना लिया. एमबीएस ने नाम नहीं लिया तो यह बात समझ तो आती है पर हैरत की बात तो यह है कि जो प्रधान मंत्री मोदी पाकिस्तान को सबक सिखाने की घोषणा कर चुके हैं. सेना को इस बात की छूट दे चुके हैं कि वह जब चाहे बदला लेने की कार्वाई करे, वही प्रधान मंत्री सऊदी प्रिंस से दो पक्षीय समझौते के बाद जारी बयान में आतंकवाद की बात तो करते हैं लेकिन उनकी कौन सी मजबूरी थी कि उन्होंने प्रिंस के सामने पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया.

क्या इसलिए कि क्राउन प्रिंस सलमान ने ऐसी शर्त रखी थी कि आतंकवाद पर किसी भी देश का प्रत्यक्ष नाम ना लिया जाये?

 

दि हिंदू में एक लेख में मिशिगन स्टे युनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद अयूब ने लिखा है कि हाल के दिनों में कश्मीर मामले पर सऊदी अरब का झुकाव पाकिस्तान की तरफ बढ़ा है. लिहाजा ऐसे में सऊदी अरब, भारत के लिए आतंकवाद के मुद्दे पर बहुत सहायक नहीं हो सकता. दुनिया जानती है कि सऊदी अरब एक आर्थिक है. भारत उससे बीलियन्स ऑफ डालर के तेल आयात करता है. लेकिन सामरिक तौर पर सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान ज्यादा महत्वपूर्ण है.

 

पुलवामा का नाम भी नहीं लिया सलमान ने

ऐसे में मोदी ने जब साझा प्रेस बयान क्राउन प्रिंस के साथ जारी किया तो उन्होंने कहा कि ‘हमारी मुलाकात काफी कामयाब’ रही लेकिन जब बात आतंकवाद की आयी तो मोदी ने इसके खात्मे के लिए मिल कर काम करने की तो बात की पर पाकिस्तान का नाम तक न लिया. जबकि क्राउन प्रिंस ने पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र तक नहीं किया. हां इतना जरूर कहा कि अतिवाद हमारे लिए साझा समस्या है और इस खित्ते के देशों को इस पर मिल कर काम करना चाहिए.

 

इससे पहले सऊदी प्रिंस पाकिस्तान के दौरे पर थे तो जाहिर है पाकिस्तान ने पुलवामा आतंकी हमले के हालात पर उनसे चर्चा की और कहा कि वह भारत को बातचीत के लिए दबाव बनायें. समझा जाता है कि इसी बात के मद्देनजर सऊद अरब ने भारत को सुझाव दिया कि किसी भी तरह के अतिवाद से जुड़े मामले का हल बातचीत से होनी चाहिए.

सऊदी के लिए पाकिस्तान का सामरिक महत्व

इस मामले में यह याद रखना होगा कि पाकिस्तान सामरिक रूप से सऊदी अरब का मजबूत साझीदार है. हाल ही में ईरान से बिगड़ चुके सऊदी रिश्ते पर पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा रहा. इस मामले में भारत की भूमिका सऊदी अरब के लिए बहुत सकारात्मक नहीं थी. ऐसे में सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान के साथ खड़ा रहना या उसके बचाव में रहना उसके लिए ज्यादा कारआमद है.

कुल मिला कर कहा जा सकता है कि भारत ने सऊदी प्रिंस के साथ ट्रेड समझौते में भले ही सफलता प्राप्त कर ली हो पर उसे  आतंकवाद के मुद्दे पर सऊदी अरब से बहुत समर्थन नहीं मिलने वाला.

 

 

 

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