CAA, के खिलाफ आंदोलन के अगले दौर में विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब की तैयारी

CAA, के खिलाफ आंदोलन के अगले दौर में विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब की तैयारी

CAA NPR के खिलाफ देश भर में आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन और धरना के बाद आंदोलन तीसरे रंग में आ चुका है. इसके तहत  नागरिकता कानून व एनपीआर पर सरकार समर्थकों को तर्कपूर्ण जवाब देने की तैयारी है.

CAA के खिलाफ जागरूकता के कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. अब्बास मुस्तफा

5 दिसम्बर 2019 को संसद से कानून का रूप ले लेने के बाद नागरिकता कानून के खिलाफ पहले जोरदार प्रदर्शन हुए.इसके बाद धरना का दौर शुरू हुआ. देखते देखते शाहीनबाग की तर्ज पर फिलहाल हजारों जगहों पर नियमित प्रदर्शन का दौरान जारी है. इस बीच मीडिया, प्रबुद्ध समाज, और आम लोगों में इस कानून के विभिन्न पहलुओ पर बहस शुरू हुई.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए पटना के सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम ने हारूननगर के सैक्टर2 में नागरिकता संशोधन कानून(CAA) और नेशनल पापुलेशन रजिस्टर(NPR) के खिलाफ जनजागरण अभियान के तहत एक सम्मेलन का आयोजन किया. इस सम्मेलन का आयोजन विख्यात चिकित्सक व सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अब्बास मुस्तफा की पहल पर किया गया.

कार्यक्रम में रि. जस्टिस अनवार आलम, जस्टिस महफूज समेत अन्य सामाजिक कार्यकर्ता हुए शामिल

 

इस अवसर पर कानूनविशेषेज्ञ, पत्रकार, सामाजिक चिंतक, लेखक व राजनीतिक विश्लेषकों ने अपनी बात रखी.

पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट खुर्शीद आलम ने कहा कि नागरिकता का यह कानून संविधान के धर्मनिरपेक्षता के उसोलों के विपरीत है  इसलिए इस किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि यह कानून दरअसल आरएसएस के प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसके तहत अकलियतों को निशाने पर ले कर पिछड़ों और दलितों को गुलाम बनाने की तैयारी है.

पटना के हारून नगर में सम्मेलन

इस अवसर पर डॉ. अब्बास मुस्तफा ने कहा कि सीएए के खिलाफ लम्बी और मजबूत लड़ाई लड़नी है इसलिए यह जरूरी है कि लोगों में इस कानून के विभिन्न तकनीकी व राजनीतिक पहलुओं की जानकारी हो.

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कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता अरशद अजमल ने कहा कि असम के एनआरसी ने भाजपा सरकार के होश उड़ा दिये. जिसमें ज्यादातर हिंदू ही इसके शिकार बन गये. इसलिए सरकार ने नागिरकता का कानून ले कर आयी ताकि उन्हें बचाया जा सके.लेकिन असम के हिंदू ही इसका सबसे मुखर विरोध कर रहे हैं.

क्षेत्रीय दलों को मिटाने का षड्यंत्र

वहीं इस अवसर पर नौकरशाही डॉट कॉम के सम्पादक इर्शादुल हक ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून और एनपीआर व एनआरसी के पीछे आरएसएस-भाजपा की व्यापक रणनीति यह है कि वह रिजनल पार्टियों को मिटाना चाहती है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों की नागरिकता समाप्त करने का सबसे घातक असर क्षेत्रीय दलों पर पड़ेगा. अगर एनआरसी लागू हो गया तो अखिलेश यादव, हेमंत सोरेन, मायावती, तेजस्वी यादव जैसे क्षेत्रीय पार्टियों का नामोनिशान मिट जायेगा. भाजपा यही चाहती है.

पटना लॉ कॉलेज के शरीफ आलम ने कहा कि यह कानून देश के संविधान का उल्लंघन है. इसके बावजूद यह कानून पास हो गया तो हमारे पास इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार है और हमें अपना विरोध नियमित जारी रखना चाहिए.

अपने संबोधन में जस्टिस(रि.) अनवर अली ने कहा कि अगर कोई भारतीय, भारत रह कर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाये तो फिर यह कैसे संभव है कि वह खुदको बांग्लादेश, पाकिस्तानी या अफगानिस्तानी साबित करेगा क्योंकि भारतीय न होने की हालत में उसे साबित करना होगा कि वह ऊपर के तीन देशों में से किसी एक देश का है.

वक्ताओं ने इस अवसर पर एक मत से कहा कि हमें इस तरह के आयोजनों को लगातार करने की जरूरत है ताकि लोगों में इस कानून के खिलाफ जागरूकता लाई जा सके.

 

 

 

 

 

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