मुखिया जी नहीं दे रहे अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा,300 पंचायत प्रतिनिधियों पर केस दर्ज

दीपक कुमार ठाकुर
(बिहार ब्यूरो चीफ)

पटना : बिहार सरकार के लोकायुक्त के आदेश के बाद भी प्रदेश के सभी त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि अपनी चल अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दे रहे हैं। गौरतलब है कि लोकायुक्त ने 2019 में ही भ्रष्टाचार की शिकायत आने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों को चल व अचल संपत्ति का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया था।

50 प्रतिशत पंचायत प्रतिनिधियों ने नहीं दिया है संपति का ब्यौरा

पिछले साल जारी लोकायुक्त के निर्देश के बाद पंचायत प्रतिनिधियों को चल अचल संपत्ति की घोषणा करना अनिवार्य हो गया था। पंचायती राज विभाग के अनुसार 31 दिसंबर 2019 तक ही संपत्ति की घोषणा करने को कहा गया था ।लेकिन अभी तक 50% पंचायत प्रतिनिधियों ने संपत्ति का सही व पूरा ब्यौरा नहीं दिया है। वहीं सूत्रों की माने तो 50% पंचायत प्रतिनिधियों ने संपत्ति का सही बार पूरा ब्यौरा पंचायती राज विभाग को दे दिया है ।बताया जा रहा है कि कई जिलों में संपत्ति का ब्यौरा देने वालों की संख्या अच्छी है। पंचायत प्रतिनिधियों की एक बड़ी संख्या संपत्ति का ब्यौरा अभी तक नहीं दे पाया है।

300 पंचायत प्रतिनिधियों पर हो चुका है केस दर्ज

बता दें कि भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद ही चल अचल संपत्ति का ब्यौरा देना अनिवार्य किया गया था। गौरतलब है की 2006 से लेकर 2019 तक 300 पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत पाए जाने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। तकरीबन 100 मामले निगरानी थाने में दर्ज हैं। वहीं निगरानी ब्यूरो ने 69 मामलों में चार्जशीट भी दायर किया है।

गौरतलब है कि कई मुखिया को रिश्वत लेते रंगे हाथ धरा गया है। शिक्षक नियोजन में भी मुखिया के द्वारा गड़बड़ी की काफी शिकायतें सामने आई थी। जिसकी जांच अभी भी चल रही है ।शिक्षक नियोजन के दौरान तो कई मुखिया को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था। वहीं दर्जनों मुखिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज हो चुका है।

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