Surgical Strike:बिहार में दूसरे फेज के चुनाव के बाद फिर पसरा NDAमें सन्नाटा

Surgical Strike: बिहार में दूसरे फेज के चुनाव के बाद फिर पसरा NDA में सन्नाटा

प्रथम चरण के चुनाव के बाद 18 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के चुनाव के बाद भी NDA की मायूसी के बादल नहीं छटते नजर आ रहे हैं.Surgical Strike कॉलम में पढ़िये इर्शादुल हक का अनालिसिस.

इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

गुरुवार को देश के 95 लोकसभा क्षेत्रों के साथ बिहार की पांच सीटों पर चुनाव हुए. इन पांचों लोकसभा सीटों में से चार पर महागठबंधन का कब्जा है. आज हुए मतदान के बाद एनडीए के खेमे में बहुत उत्साह नहीं है. क्योंकि एनडीए ने लाख कोशिशों के बावजूद कहीं भीतरघात का शिकार रहा तो कहीं बागी उम्मीदवारों ने उसकी नाक में दम कर रखा था.

वहीं पांच में से चार सीटों पर राजद और कांग्रेस के खेमे में उत्साह तो है पर किशनगंज लोकसभा सीट पर कांग्रेस की राह आसान नहीं है. यहां के चुनाव में एमाईएम के उम्मीदवार अख्तरुल ईमान ने लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कामयाब कोशिश की है.

गौरतलब है कि 18 अप्रैल को दूसरे चरण में भागलपुर, बांका, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया सीटों पर चुनाव हुए हैं.

 

इन पांच सीटों में बांका, भागलपुर सीट पर  पिछली बार राजद ने कब्जा जमाया था. वहीं किशनगंज सीट कांग्रेस के हाथ में थी तो कटिहार में तारिक अनवर राष्ट्रवादी कांग्रेस से चुनाव जीते थे जो इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े हैं. इस तरह पांच में से चार सीटों पर महागठबंधन का कब्जा था जबकि पांचवी पूर्णिया की सीट पर जदयू के संतोष कुशवाहा जीते थे. आइए एक-एक कर पांचों लोकसभा सीटों के गणित को समझने की कोशिश करते हैं.

बांका

 

बांका लोकसभा क्षेत्र से एनडीए ने गिरिधारी यादव को टिकट दिया था. महागठबंधन के घटक राजद के कब्जे में जयप्रकाश नारायण के पास पहले से यह सीट थी. लिहाजा राजद ने जयप्रकाश पर फिर से भरोसा जताया था. उधर भाजपा में रही पुतुल सिंह ने इस दफा फिर निर्दलय उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव मैदान में उतर गयी थीं. भाजपा ने उन्हें लाख मना करने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी. एनडीए के लिए राजद के जयप्रकाश अगर चुनौती थे तो भाजपा की बागी उम्मीदवार पुतुल सिंह खुद जदयू के लिए मुसीबतों के पहाड़ के रूप में खड़ी थीं. 2014 के चुनाव में आरजेडी प्रत्याशी जय प्रकाश नारायण यादव को 2 लाख 85 हजार 150 वोट हासिल किए थे और करीबी प्रत्याशी पुतुल कुमारी को हराया. पुतुल कुमारी ने यह चुनाव तो निर्दलीय लड़ा था, लेकिन बाद में बीजेपी ज्वॉइन कर ली थी. इस चुनाव में पुतुल कुमारी को 2 लाख 75 हजार 6 वोट प्राप्त हुए थे. इस तरह जयप्रकाश नारायण यादव ने मात्र दस हजार वोट से जीत हासिल की थी.

 

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लेकिन इसबार के चुनाव में एनडीए के कैडर वोट में बिखराव था. जिसका लाभ राजद के जयप्रकाश यादव को मिलने की उम्मीद की जा रही है.

 

 

भागलपुर

भागलपुर संसदीय क्षेत्र फिलवक्त राजद के कब्जे में है. यहां से बुलो मंडल ने पिछली बार जीत हासिल की थी. महागठबंधन की ओर से बुलो मंडल मैदान में हैं जबकि एनडीए खेमे से यह सीट जनता दल यू को मिली है. यहां से अजय कुमार मंडल मैदान में हैं. इसके अतिरक्त बसपा से बिहार कैडर के पूर्व आईएएस अफसर एमए इब्राहिमी मैदान में हैं. यहां की टक्कर काफी पेचीदा है. इस क्षेत्र में बुलो मंडल की जमीनी पकड़ है. अजय कुमार मंडल की चुनौतियां इसलिए गंभीर हैं क्योंकि यहां अल्पसंख्यकों का वोट 21 प्रतिशत के करीब है. अगर अजय कुमार मंडल अल्पसंख्यक वोटरों में सेंधमारी करने में सफल रहते हैं तो उनके लिए बुलो मंडल की जमीन तंग करना मुश्किल नहीं होगी.

 

किशनगंज

किशनगंज से कांग्रेस ने डा.जावेद को मैदान में उतारा था. जावेद किशनगंज विधानसभा से लगातार चार बार विधायक हैं. जबकि यहां से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम ने कोचाधामन के पूर्व विधायक अख्तरुल ईमान को उतारा है. तीसरे उम्मीदवार जदयू से महमूद अशरफ हैं. असल लड़ाई कांग्रेस औरएमआईएम में है. यहां कांग्रेस के डा. जावेद की जमीनी पकड़ को वोट में बदलने और ओवैसी की तरह फायरब्रांड तकरीर करने वाले अख्तरुल ईमान की बातों से प्रभावित युवाओं के वोट में बदलने के बीच असल लड़ाई है. वैसे सोशल मीडिया पर जिस तरह से अख्तरुल ईमान के पक्ष में युवाओं में उत्साह देखने को मिली है वह किशनगंज के किसी भी प्रत्याशी के लिए घबराहट लाने वाला है. अगर ओवैसी की पार्टी ने बिहार में खाता खोलने में कामयाबी हासिल कर ली तो  ओवैसी यहां से एक मजबूत ताकत बन सकते हैं.

कटिहार-

जहां तक कटिहार की बात है तो कांग्रेस प्रत्याशी तारिक अनवर के लिए यहां से सांसदी बचाने की लड़ाई जदयू के दुलाल चंद गोस्वामी से है. गोस्वामी के साथ दिक्कत यह है कि कटिहार में उन्हें एनडीए के सहयोगियों का भरपूर समर्थन नहीं मिला है. जबकि तारिक अनवर के सामने खुद एक चुनौती राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार से भी है. लेकिन कुल मिला कर महागठबंधन के खेमे में ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है.

  पूर्णिया

पूर्णिया सीमांचल की एक मात्र ऐसी सीट है जिस पर एनडीए का कब्जा  है. उसके लिए अपनी इस सीट को बचाने की चुनौती है. इस सीट पर जदयू के संतोष के लिए मुश्किल यह है कि यहां से भाजपा के सांसद रहे पप्पू सिंह कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं और कांग्रेस के टिकट पर संतोष को टक्कर दे रहे हैं. ऐसे में यहां की फाइट काफी जटिल हो गयी है. अब देखना है कि जदयू अपनी सीट बचा पाता है कि कांग्रेस सीमांचल में अपना और विस्तार करती है.

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