न्यू मीडिया को नाथने के लिए आया बिहार सरकार का आदेश

न्यू मीडिया को नाथने के लिए आया बिहार पुलिस का आदेश

बिहार सरकार का एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया। अब सरकार पर टिप्पणी जेल पहुंचा सकती है। सवाल है बिहार किधर? बिहार केरल बनेगा या यूपी?

कुमार अनिल

क्या आपको पवन जायसवाल का नाम याद है? ज्यादा दिन नहीं हुए, सिर्फ डेढ़ साल पहले पवन जायसवाल पर यूपी पुलिस ने कई धाराएं लगाते हुए एफआईआर की। उनका जुर्म बस इतना था कि उन्होंने मिर्जापुर के एक सरकारी स्कूल में मिड डे मील के तहत बच्चों को दाल-भात-सब्जी की जगह सिर्फ रोटी और नमक दिए जाने का वीडियो बनाया। वे स्थानीय पत्रकार थे।

सरकार की फजीहत होने लगी, तो पवन के खिलाफ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने मामला दर्ज कराया, जिसमें उन पर आरोप लगाया गया कि वे उत्तर प्रदेश सरकार की छवि धूमिल कर रहे है।

बिहार पुलिस मुख्यालय ने सभी प्रधान सचिव, सचिव को एक पत्र लिखा है कि सोशल मीडिया-इंटरनेट के माध्यम से सरकार, मंत्री, सांसद, विधायक के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की जा रही है। ऐसी टिप्पणी को साइबर अपराध माना जाए और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। सवाल है अभद्र टिप्पणी की क्या परिभाषा होगी?

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दो महीना पहले एडिटर्स गिल्ड ने यूपी सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रदेश में पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। गिल्ड ने स्क्राल की कार्यकारी संपादक सुप्रीया शर्मा और दिल्ली के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को प्रताड़ित करने का उदाहरण दिया था। यह भी याद रखिए कि मिर्जापुर की घटना में ग्राम प्रधान राजकुमार पाल पर भी एफआईआर हुई थी। एक शिक्षक सस्पेंड हुए थे।

यूपी के डा. कफील से बिहार के लोग भी परिचित हैं। उन्हें सरकार के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा के आरोप में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कफील के भाषण की सीडी देखी। कोर्ट ने उनके भाषण में कुछ भी आपत्तीजनक नहीं पाया था। उन्हें बेल तक के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। 18 महीने तक जेल में रहना पड़ा।

बिहार में भी देखा जा रहा है कि सरकार की आलोचनावाली खबरें अखबारों में जगह नही बना पाती हैं। अधिक से अधिक किसी एक जिले में छप कर रह जाती है। विपक्ष को भी कम जगह मिलती है। वहीं न्यू मीडिया, जिसमें छोटे-छोटे यू-ट्यूब चैनल, वेबसाइट शामिल हैं, वे सरकार की कमजोरियों को उजागर करने में आगे हैं। इसके अनेक उदाहरण हमारे सामने हैं।

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उत्तर प्रदेश की तरह केरल में भी सरकार ने एक ऐसा ही अध्यादेश लाया था, जिसकी विपक्ष ने कड़ी आलोचना की। खुद सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने भी विरोध किया। इसके बाद सरकार ने वह अध्यादेश वापस ले लिया।

राजद सासंद मनोज झा ने इस आदेश पर कहा है-बिहार किधर? सवाल सही है। क्या बिहार केरल की राह चलेगा या यूपी बनेगा?

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