नीतीशजी यह कैसा राज है ? छह जिलों में दंगाइयों ने तांडव मचाया, प्रशासन नाकारा बना रहा!

आदरणीय नीतीशजी!  दशहरा और मुहर्रम के दौरान हालात अनेक जिलों में बुरे हैं. जमुई में भारी तनाव है, तो सिवान में तोड़फोड़ और हिंसा हुए. नवादा तो रामनवमी से ही तप रहा है रही बात आरा और ठाकुरगंज की तो वहां भी स्थिति ठीक नहीं.

बिहार की हालत ऐसी हो जायेगी कि दो समुदायों के बीच दुश्मनी की ऐसी लकीर खीच दी जायेगी, यह चिंता की बात है.  इन तमाम जगहों पर जो हालात हैं, उसमें दोनों समुदायों के कट्टरपंथियों की भले जो भूमिका रही हो, लेकिन उससे भी शर्मनाक यह है कि आपके प्रशासनिक अमले के आला अधिकारियों ने हर जगह सरासर नाकारेपन का सुबूत दिया है. जमुई के डीएम और एसपी ने जिस लापरवाही और संवेदनहीनता का परिचय दिया है इसकी सूचना अवश्य आप तक पहुंचाई गयी होगी, लेकिन इसके बावजूद हालात बुरे हैं. आज दिन भर वहां तनाव का माहौल रहा, वहां के साम्प्रदायिक प्रवृत्ति के नेताओ ने डेरा डाल रखा है. बीते दिन तो वहां खूब तांडव मचा. दुकानें लूटी गयीं, जलाई गयीं. भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव ने जो बातें नौकरशाही डॉट कॉम को बताई हैं उससे चिंता और बढ़ती है. उन्होंने कहा है कि छतों से लोगों ने एक धार्मिक जुलूस पर पत्थर बरसाये. हालांकि विकास वैभव भागलपुर से वहां पहुंचे इससे पहले ही हालात बुरे थे. वहां के डीएम और एसपी ने अपने नाकारेपन का पूरा सुबूत दिया.

हालांकि नवादा के हालात पहले से ही तनावपूर्ण थे, लेकिन वहां से जो खबरें हमें मिली हैं, वहां पर प्रशासन की भूमिका कुछ हद तक ठीक थी. शायद इसकी वजह यह रही हो कि रामनवमी के अवसर पर वहां मचे तांडव के बाद वहां के डीएम और एसपी की भारी फजीहत पहले ही हो चुकी थी. शायद इस कारण  वहां के अधिकारियों ने कुछ सख्ती और कुछ भाईचारे के लिए काम किया.

जहां तक आरा के पीरो की बात है तो वहां के स्थानीय अधिकारियों ने भी काफी ढ़ीला रवैया अपनाया. इसी तरह चिंता की बात सीमांचल के अनेक क्षेत्रों में देखी गयी. कटिहार और आसपास का इलाका आपसी भाईचारे के लिए विख्यात रहा है. हिंदू-मुस्लिम एकता यहां हमेशा कायम रही है. पर इस बार समाज में जहरीली मानसिकता फैलाने वालें नेताओं ने कामयाबी हासिल कर ली और समाज को बांटने की कोशिश की.

सीतामढ़ी के बैरगनिया में तांडव हुआ तो पूलिस सक्रिय हुई. इन तमाम जगहों के पीछे मचे तांडव की रूपरेखा एक जैसी दिखती है. जो बताती है कि प्रशासन से भिड़ जाने और कानून व्यवस्था की धज्जी उड़ाने में भी दंगाइयों को भय नहीं. इसके पीछे  कुछ राजनीतक नताओं का सह है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता.

कुल मिला कर इन छह सात जगहों पर दर्जनों घरों-दुकानों को लूटा गया या जला डाला गया. ऐसी स्थिति क्यों आने दी गयी? क्या यह आपके प्रशासन की विफलता नहीं है? अगर विफलता है तो प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान होनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. कम से कम जमुई के डीएम एसपी को तो वहां से तत्काल हटाया जाना चाहिए.

आदरणीय नीतीशजी आपकी सरकार का दावा रहा है कि कानून का राज ही आपका टीआरपी है, लेकिन यह कैसा कानून का राज है कि जमुई में लोग या तो सड़कों पर तांडव मचा रहे हैं या जो डरे-सहमे हैं वह चार दिनों से घरों में दुबके हैं.

आग्रह है कि समाज में बढ़ते विभेद और नफरत फैलाने वालों पर बिना सहानुभूति के कार्रवाई हो और अमन बहाली में कोई मुर्रवत ना बरता जाये.

आपका

इर्शादुल हक

एडिटर नौकरशाही डॉट काम

 

 

 

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