नहीं बढ़ेगी सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। विधान परिषद में कांग्रेस के मदन मोहन झा और प्रेम चंद्र मिश्रा के ध्यानाकर्षण सूचना का समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह के जवाब के बाद मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि राज्य स्तर पर वृद्धजन पेंशन योजना चलाई जा रही है।

इसमें प्रति माह 400 रुपये देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बिहार पिछड़ा राज्य है, इसके बावजूद वह लोगों की कुछ न कुछ सहायता करना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी वर्ग के 60 वर्ष की आयु वाले वैसे सभी लोगों को वृद्धजन पेंशन का लाभ दिया जा रहा है, जो किसी और पेंशन योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं। इस योजना को इस वर्ष मार्च से ही शुरू होना था लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लागू होने से देरी हुई है। इस माह से इसे लागू कर दिया जाएगा।

उधर बिहार सरकार राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में योग का पाठ्यक्रम शुरू कराने के लिए नए राज्यपाल फागू चौहान से विचार-विमर्श करेगी। विधानसभा में आज राष्ट्रीय जनता दल के भोला यादव के अल्पसूचित प्रश्न का शिक्षा विभाग की ओर से जब संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार उत्तर दे रहे थे उसी दौरान उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि श्री यादव ने विश्वविद्यालयों में योग की पढ़ाई शुरू करने के लिए जो सवाल किया है वह उचित है। उन्होंने कहा कि राज्य के नए राज्यपाल श्री चौहान आ रहे हैं। सरकार उनसे मिलकर योग को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल करने के विषय पर विचार-विमर्श करेगी।

इससे पहले राजद के भोला यादव ने कहा कि बिहार योग की जन्मस्थली रही है लेकिन राज्य में कहीं भी योग की पढ़ाई नहीं होती है। आज देश-विदेश में योग काफी लोकप्रिय हो गया है। वह इसके लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि क्या सरकार कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में योग का पाठ्यक्रम शुरू करना चाहती है या नहीं।

इस पर मंत्री श्रवण कुमार ने स्वीकार किया कि राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय में योग की अभी पढ़ाई नहीं होती है। मुंगेर में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था है, जहां योग के विभिन्न पाठ्यक्रम हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में योग को शामिल करने का प्रस्ताव आने पर सरकार उस पर विचार करेगी। विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम के संबंध में राज्य सरकार अनुशंसा करती है, जिस पर निर्णय कुलाधिपति (राज्यपाल) लेते हैं।

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