नीतीश-तेजस्वी के सामने होंगी दो अलग-अलग चुनौतियां, अवसर भी

नीतीश-तेजस्वी के सामने होंगी दो अलग-अलग चुनौतियां, अवसर भी

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के सामने दो भिन्न चुनौतियां होंगी। क्या वे इन चुनौतियों को अवसर में बदल पाएंगे? उपेंद्र कुशवाहा ने कुछ कहा, कुछ छिपाया।

कुमार अनिल

बिहार में सत्ता बदल गई है। उम्मीदें बढ़ गई हैं। नौकरशाही डॉट कॉम ने कई लोगों से बात की। लोग महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं। दोनों के लिए लोग भाजपा को ही जिम्मेदार मानते हैं। बिहार में बदलाव को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

अब नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव की सरकार आ रही है। वोट प्रतिशत के लिहाज से यह गठबंधन बेहद मजबूत है, इसमें दो राय नहीं। बड़ा सवाल यह है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव से बिहार की जो अपेक्षा है, वे उसे किस प्रकार पूरा करते हैं। दोनों नेताओं से लोगों की अलग-अलग अपेक्षा होगी।

तेजस्वी यादव के लिए आनेवाला समय बेहद चुनौतीपूर्ण होने जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें युवाओं का समर्थन मिला था। उन्होंने रोजगार, पढ़ाई, दवाई का मुद्दा उठाया था। नौकरशाही डॉट कॉम ने राजद के कई नेताओं का सोशल मीडिया प्रोफाइल चेक किया। रोजगार के लिए संघर्ष करनेवाले शिक्षक, अन्य अभ्यर्थी अभी से कहने लगे हैं कि उनकी मांग पूरी कराएं। तेजस्वी ने कहा था कि मुख्यमंत्री बने तो पहला सिग्नेचर दस लाख रोजगार पर करेंगे। अब भी ढाई साल से ज्यादा का वक्त है। इस दिशा में सचमुच उन्होंने प्रयास किया, तो वे भविष्य में पिता की तरह ही बिहार के बड़े नेता बन कर उभरेंगे। यह उनके सामने चुनौती भी है और अवसर भी।

नीतीश कुमार से लोगों की अपेक्षा हाोगी कि वे बिहार में विकास के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में संघ और भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे का किस तरह मुकाबला करते हैं। किस तरह संस्थाओं के बेजा इस्तेमाल के खिलाफ आवाज बनते हैं और देश की विपक्षी राजनीति को किस प्रकार नई धार देते हैं। उनके लिए भी यह चुनौती और अवसर दोनों होगा। उन्हें दिखाना होगा कि उनमें सचमुच पीएम मैटेरियल है।

जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि भाजपा देश को रूढ़िवाद में धकेलना चाहती है। वे उन कोशिशों से बाहर निकल आए हैं। यह बात तो उन्होंने सही कही, लेकिन हिंदुत्व पर चुप रहे। हिंदुत्व मुख्य है। इसी का एक अंग है रूढ़िवाद। देश में हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत की राजनीति पर कुशवाहा चुप रहे। अब लोग उम्मीद करेंगे कि आप भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति पर हमला करें। ऐसा किए बिना कोई पीएम मैटेरियल वाला नेता कैसे हो सकता है। मालूम हो कि कल ही कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश कुमार में पीएम मैटेरियल है।

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