यूपी सरकार ने विध्वंस कर दी 100 साल पुरानी मस्जिद

यूपी सरकार ने विध्वंस कर दी 100 साल पुरानी मस्जिद

सैयद फारूक अहमद फोटो ( गरीब नवाज मस्जिद 100 साल पुरानी थी

कोरोना कुप्रबंधन और गंगा किनारे हजारों लाशों से यूपी सरकार बेइज्जती झेल रही है इसी दौरान बारबंकी में मस्जिद पर बुल्डोजर से ध्वस्त करने की खबर है.

सौ साल पुरानी मस्जिद को बाराबंकी के जिला प्रशासन की देख रेख में शहीद किया गया. इस घटना के बाद जिले के मुसलमानों में भारी गुस्सा है.

अलजजीरा इंग्लिश वेबसाइट के अनुसार सौ साल पुरानी गरीब नवाज मस्जिद को सोमवार के दिन लोक प्रशासन ने ध्वस्त करवा दिया. इतना ही नहीं मस्जिद के मलबे को पास की नदी में डाल दिया गया.

तेजस्वी का बंगला बना अस्पताल, नीतीश को कहा, कीजिए संचालन

मसुलमानों ने इस मामले में हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है. बताया जाता है कि मस्जिद पर किसी भी तरह क्षति पहुंचाने से अदालत ने 31 मई तक रोक लगा रखी थी. इसके बाद भी इस वाक्ये को अंजाम दिया गया.

जब मस्जिद का विध्वंस किया जा रहा था तब वहां सैकड़ों की संख्या में पुलिस मौजूद थी. और मस्जिद के चारों ओर का रास्ता बंद कर दिया गया था ताकि वहां कोई न आ सके. यूपी में योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है और उनका ट्रैक रिकार्ड मुसलमानों के प्रति घृणा से भरा रहा है.

यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने प्रशासन की इस कार्रवाई की आलोचना की है. बोर्ड ने कहा है कि अदालत ने इस मस्जिद के विध्वंस पर 31 मई तक रोक लगा दी थी इसके बावजूद कोर्ट के आदेश की अवहेलना की गयी.

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा है कि वह इस मामले को अदालत में ले जायेगा और मस्जिद के पुनर्रनिर्माण की अपील करेगा. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सचिव खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा है कि मस्जिद को बिना कानूनी अधिकार के ढाह दिया गया.

एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सैयद फारूक अहमद ने अलजजीरा को बताया है कि पिछले एक महीने से मस्जिद में नमाज अदा करने से रोक दिया गया था.15 मार्च को प्रशासन ने मस्जिद कमेटी को कारण बताओ नोटिस भेजा था. इस में हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया गया था कि किसी भी गैरकानूनी धार्मिक स्थल को तोड़ दिया जाये. फारूक ने बताया कि जिस भूखंड का जिक्र नोटिस में किया गया है वह जमीन मस्जिद के परिसर में नहीं आती. उन्होंने कहा कि मस्जिद सडक से 100 फुट की दूरी पर थी जिससे किसी तरह का ट्रैफिक प्रोब्लम भी नहीं था. मस्जिद कमेटी ने इस नोटिस का जवाब भी दिया था और प्रमाण भी दिये थे लेकिन इस पर कोई तवज्जो नहीं दी गयी.

उत्तर प्रदेस में मस्जिद विध्वंस की यह कार्रवाई ऐसे समय में की गयी है जब राज्य में कोरोना के कुप्रबंधन और संक्रमित मरीजों की हजारों की संख्या में नदी किनारे दफ्न किये जाने से राज्य सरकार दुनिया भर में बेइज्जती झेल रही है. राज्य में कोरोना गांव गांव तक फैल चुका है जबकि अस्पतालों में जरूरी सुविधा और मरीजों के लिये जगह तक नहीं है. इलाहाबाद हाई कोर्ट राज्य सरकार को आये दिन लताड़ लगाता रहा है.

ऐसे में सवला उठता है कि क्या राज्य सरकार ने कोरोना से उपजे संकट को साम्प्रदायिक उन्माद की तरफ मोडना चाहती है और लोगों का कोरना से ध्यान भटकाना चाहती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*