पाकिस्तान के PM ने  मोदी को लिखा खत, शांति वार्ता फिर से शुरू करने की पहल 

इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश वाले पत्र के जवाब में यह पत्र लिखा है। इमरान खान ने दोनों देशों के विदेश मंत्री के बीच वार्ता का प्रस्ताव भी रखा है। अब देखना है कि भारत के पीएम मोदी इस प्रस्ताव को किस रूप में स्वीकारते हैं ?
narendra modi and imran khan
दिल्ली । भारत -पाक के रिश्तों को सुधारने की दिशा में पाकिस्तानी पीएम ने सकारात्मक कदम बढा़ए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दोनों देशो के बीच शांतिवार्ता को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है।
खबरों के  मुताबिक इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश वाले पत्र के जवाब में यह पत्र लिखा है। इमरान खान ने दोनों देशों के विदेश मंत्री के बीच वार्ता का प्रस्ताव भी रखा है। वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ अधिवेशन में शिरकत करने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को न्यूयार्क जाना है। आज विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक वार्ता में इस पर कोई आधिकारिक बयान आ सकता है।
उन्होंने अपने खत में लिखा है कि भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बीच अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के दौरान बातचीत हो। इमरान खान का यह पत्र प्रधानमंत्री मोदी के उस संवाद के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच सार्थक और रचनात्मक जुड़ाव की बात कही थी। वहीं प्रधानमंत्री ने यह बात इमरान खान की जीत के बाद दिए भाषण के बाद कही थी जिसमें इमरान बोले थे कि अगर भारत संबंधों को बेहतर करने के लिए कदम बढ़ाता है तो पाकिस्तान दो कदम बढ़ाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अपने पत्र में इमरान खान ने 2015 में दोनों देशों के बीच शुरू हुई बातचीत को फिर से बहाल करने की बात भी कही है। याद रहे कि यह बातचीत पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद से रुक गई है। इस आधार पर खान ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर और आतंकवाद समेत सभी आउटस्टेंडिंग मुद्दों को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करें।
गौरतलब है कि दिसंबर 2015 में सुषमा स्वराज हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के लिए इस्लामाबाद गईं थीं और उसके बाद से दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। भारत अपनी बात पर स्थिर है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती है। अब देखना है कि भारत के पीएम मोदी इस प्रस्ताव को किस रूप में स्वीकारते हैं ?

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