पांच राज्यों के किसानों के नाम अपील में मोर्चा ने कही बड़ी बात

पांच राज्यों के किसानों के नाम अपील में मोर्चा ने कही बड़ी बात

संयुक्त किसान मोर्चा ने पांच राज्यों के वोटरों के नाम अपील जारी की। कहा, जिसने किसानों का अपमान किया, उसे न दें वोट। असम भी जाएंगे। साथ ही कही बड़ी बात।

कुमार अनिल

किसान नेता योगेंद्र यादव कोलकाता में हैं। उन्होंने सभा के बाद कहा-सौ दिन हो गए। ये लोग ना संविधान की बात सुनते हैं, ना कानून की। ना यो लोग नैतिकता जानते हैं ना अच्छा-बुरा। ये एक ही भाषा समझते हैं-वोट, कुर्सी और सरकार। जब तक इनकी कुर्सी न हिलाओ, इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। इसीलिए किसान आंदोलन ने आगामी चुनावी में बीजेपी को वोट की चोट देने का फैसला किया है।

उधर आज शाम संयुक्त किसान मोर्चा ने पांच राज्यों के किसानों के नाम अपील जारी की। अपील की शुरुआत में ही कहा गया है कि किसान विरोधी भाजपा को सजा देने के लिए बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों से अपील।

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अपील में कहा गया है कि हम किसान 105 दिनों से अपना घर, अपनी खेती छोड़कर दिल्ली के दरवाजे पर टेंट में, ट्रैक्टर की ट्राली में बैठे हैं। हम कड़कड़ाती ठंड में बैठे रहे, तेज बारिश में बैठे रहे और अब तेज धूप में बैठे हैं। हम वापस नहीं जाएंगे। हम अपना अधिकार चाहते हैं।

अपील में आगे कहा गया है- आंदोलनकारी किसान सिर्फ अपने लिए नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि आनेवाली पीढ़ी के लिए खेती बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम किसानों के सम्मान के लिए लड़ रहे हैं। अबतक 290 किसानों ने अपनी जान दे दी है। हम आपके सामने भाजपा सरकार की कड़वी सच्चाई सामने रखना चाहते हैं। इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से बताया गया है कि किस प्रकार किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए दमन किया गया।

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अपील में विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार किसानों को देशद्रोही साबित करने, उन्हें जाति-धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की गई। कहा गया है कि किसानों के अपमान के खिलाफ हम आपका समर्थन चाहते हैं।

आगे बड़ी बात कही गई है कि मोदी सरकार सच्चाई, संविधान, न्याय की भाषा नहीं समझती। यह सरकार केवल वोट, कुर्सी और सत्ता की भाषा समझती है। किसान मोर्चा यह नहीं कह रहा कि आप किसे वोट दें, बल्कि इतना ही कह रहा है कि आप किसान विरोधी भाजपा को वोट न दें #NoVoteToBJP। एक किसान ही किसान का दर्द समझ सकता है, इसलिए आप हमारी अपील को सकारात्मक रूप से लेंगे।

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