पंचायत चुनाव : ये है सबसे बड़ा सवाल, पूछिए हर प्रत्याशी से

पंचायत चुनाव : ये है सबसे बड़ा सवाल, पूछिए हर प्रत्याशी से

पंचायत चुनाव के पोस्टर दिखने लगे हैं। हर प्रत्याशी तीन शब्द जरूर बोल रहे हैं- सुयोग्य, कर्मठ और ईमानदार। इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल क्या है?

सुरेंद्र राय, सारण

कुमार अनिल

जब हर चीज पीली दिखे, तो आप कैसे पहचानेंगे कि कौन सोना है और कौन पीतल। पंचायत चुनाव में हर प्रत्याशी खुद को सेवक, कर्मठ, ईमानदार बता रहा है। कैसे पहचानेंगे कि कौन सचमुच ईमानदार है।

पंचायत चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायतों का गठन जनशक्ति को ताकत देने के लिए किया गया था। इसे पंचायत सरकार भी कहते हैं। क्या कोई ऐसा प्रत्याशी है, जो जीतने के बाद भी जनता के प्रति जिम्मेदार रहे? जीतने के बाद भी उस प्रत्याशी पर जनता का नियंत्रण रहे?

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यह सिर्फ कहने की बात नहीं है। कहने को तो सभी कहेंगे कि हम जीतने के बाद भी आपके साथ रहेंगे, लेकिन क्या इसके लिए उनके पास कोई प्रणाली है?

कल सारण जिले के शोभेपुर से भेल्दी के इलाके में कई लोगों, प्रत्याशियों से बात करने का मौका मिला। अनेक प्रत्याशी विश्वास दिलाते रहे कि वे ईमानदार रहेंगे। कुछ ने अपने पिछले रिकार्ड बताए कि वे पहले ईमानदार थे। सवाल था कि आगे भी ईमानदार रहेंगे, इसकी क्या गारंटी है?

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इसी क्षेत्र से जिला परिषद का चुनाव लड़ रहे सुरेंद्र राय से मुलाकात हुई। वे सरपंच रह चुके हैं। उनसे भी यही सवाल किया, तो उनके पास जवाब था।

सुरेंद्र राय पंचायत चुनाव में सबसे अलग मॉडल पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे चुनाव जीतते हैं, तो हर गांव में जन कल्याण समिति बनाएंगे। समिति का चुनाव पूरे गांव की बैठक से होगा। यह समिति ही तय करेगी कि गांव में विकास का कौन-सा कार्य करना है। जीतने के बाद वे समिति के प्रति जिम्मेवार होंगे।

आम तौर से चुनाव में वोट लेने के बाद वोटर से ऊपर हो जाता है पंचायत प्रतिनिधि, जबकि यह जन कल्याण समिति अपने प्रतिनिधि पर नियंत्रण रखेगी। साथ ही समिति हर कार्य की गुणवत्ता पर नजर रखेगी। आजकल देखते हैं कि काम हो गया, लेकिन क्वालिटी इतनी खराब रहती है कि छह महीने में सबकुछ ध्वस्त हो जाता है।

उन्होंने दूसरी खास बात कही कि वे हर साल अपना रिपोर्ट कार्ड जनसभा करके जनता के सामने पेश करेंगे।

आप भी अपने प्रत्याशी से जरूर पूछिए कि वोट लेने के बाद वे जनता के नियंत्रण में कैसे रहेंगे? जनता द्वारा प्रतिनिधि चुने जाते हैं, पर जनता के लिए बाद में नहीं रह जाते। चुने जाने के बाद भी वे जनता के लिए रहेंगे, इसकी कोई प्रणाली उनके पास है?

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