Paras HMRI ने स्वतंत्रता दिवस पर दिया Plasma Bank का तोहफा

Paras HMRI ने स्वतंत्रता दिवस पर दिया Plasma Bank का तोहफा

पटना के Paras HMRI अस्पताल में Plasma बैंक की शुरुआत 15 अगस्त से कर दी गयी है. इसके लिए अस्पताल को सरकारी अनुमति मिल चुकी है.

हाॅस्पिटल के रीजनल डायरेक्टर डाॅ. तलत हलीम ने कहा, प्लाज्मा से कोरोना मरीजों का इलाज होता है, उनकी जान बचाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में लोग प्लाज्मा दान करें

Paras Hospital, Patna में बिना बेहोश किये हुआ Bypass Surgery


पारस एचएमआरआई सुपर स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल, पटना 15 अगस्त से कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा बैंक की शुरुआत हो गयी है.

डॉ. तलत हलीम ने बताया कि प्लाज्मा निकाल लेने के बाद खून के पतले हिस्से को जिसे पलाज्मा कहा जाता है स्टोर कर लिया जाता है जबकि बचे हुए खून को पुनः उसी व्यक्ति के शरीर में डाल दिया जाता है। छह लीटर खून में प्लाजामा बमुश्किल 300-40 एमल निकलता है.

इसके लिए उसे लाइसेंस मिल चुका है। यह जानकारी देते हुए हाॅस्पिटल के रीजनल डायरेक्टर डाॅ. तलत हलीम ने बताया कि प्लाज्मा से कोरोना मरीजों का इलाज होता है, इसलिए अधिक से अधिक लोगों को प्लाजमा दान करना चाहिए। उन्होंने कहा इसका डोनर कोविड का मरीज रह चुका व्यक्ति ही हो सकता है। डोनर के लिए कुछ शर्तें भी हैं। उसे स्वस्थ होना चाहिए। कोरोना से निजात पाया व्यक्ति 28 दिन बाद ही प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।

उन्होंने कहा कि उसी व्यक्ति का प्लाज्मा लिया जायेगा जिसमें एंटीबाॅडी ज्यादा होगा। इसके लिए एक जांच की जाएगी और जांच में एंटीबाॅडी सही पाये जाने पर ही प्लाज्मा लिया जायेगा। गर्भवती और बच्चे को जन्म दे चुकी महिलाओं का प्लाज्मा नहीं लिया जायेगा।


डाॅ. हलीम ने कहा कि हमारे यहां के प्लाज्मा बैंक से कोई भी हाॅस्पिटल प्लाज्मा ले सकेगा। उन्होंने कहा कि प्लाज्मा डोनेशन खून डोनेशन की तरह है। इसके डोनर को घबराने की जरूरत नहीं है। शरीर में कमजोरी नहीं आती, न कोई तकलीफ होती है। उन्होंने कहा कि यह रक्तदान के समान है। इसलिए मैं लोगों से अपील करता हूं कि आज से वह हमारे हाॅस्पिटल में आकर अपना प्लाज्मा दान करें। स्व्यंसेवी कार्यकर्ता भी इसमें भाग ले सकते हैं।


उन्होंने कहा कि रक्तदान की तरह ही प्लाज्मा से पहले उस व्यक्ति की कई तरह की जांच होती है और इसमें सफल रहने पर प्लाज्मा लिया जाता है। उन्होंने कहा प्लाज्मा दान से घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि प्लाज्मा निकाल लेने के बाद खून पुनः उसके शरीर में डाल दिया जाता है। प्लाज्मा खून का पतला हिस्सा होता है। यह छह लीटर खून में मुश्किल से 300 से 400 मिलीलीटर मिलता है

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