Patna Graduate क्षेत्र- अपर कास्ट का वोट छिन्न-भिन्न हुआ तो संकट में पड़ जायेंगे नीरज

विधान परिषद चुनावों को चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी के कारण टाल दिया है. पर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र ( Patna Graduate Constituency) में सूचना मंत्री नीरज कुमार ( Neeraj Kumar) को चौतरफा घेरने की रणनीति चरम पर है.

इस बार घंभीर चुनौतियां हैं नीरज के सामने

वरिष्ठ पत्रकार संजय वर्मा का विश्लेषण

बिहार के सूचना मंत्री नीरज कुमार ( Neeraj Kumar) इस patna Graduate Constituency चुनाव में बुरी तरह घिरते दिख रहे है। पूर्व की तरह इस बार भी आजाद गांधी लालटेन लेके खड़े होंगे। तो डब्लू उर्फ व्यंकटेश सिंह भी चुनावी मैदान में होंगे वहीं विधान परिषद के पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के दामाद रविरंजन कुमार सिंह अपनी तैयारियों के बल पर पूरे दमखम के साथ चुनावी अखाड़े में उतरेंगे. पटना नगर निगम के पूर्व प्रशासक जितेंद्र कुमार चुनाव लड़ने की बजाय राजपूत एकता के नाम पर रविरंजन का समर्थन कर चुके हैं.

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उधर जहानाबाद के पूर्व सांसद अरुण कुमार के सुपुत्र और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ऋतुराज भी Patna Graduate Constituency से ताल ठोकेंगे. कुर्मी बिरादरी के नालन्दा ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष दिलीप कुमार पूरे दमखम के साथ चुनाव में उतरेंगे. मतलब- पटना ज़िला का स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव रोमांचक और दिलचस्प होगा.

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एक तरफ एनडीए के प्रत्याशी के तौर पर नीरज कुमार होंगे तो दूसरी ओर राजद के आजाद गांधी को छोड़ दें तो एनडीए के वोट में सेंध लगाने के लिये राजपूत रविरंजन, भूमिहार व्यंकटेश शर्मा और ऋतुराज तो कुर्मी जाति से दिलीप कुमार मिल कर नीरज के लिए भारी मुश्किल खड़ी करने के फिराक में हैं. याद रखने की बात है कि जदयू नेता नीरज कुमार भी भूमिहार हैं.

।मतलब साफ है कि एनडीए उम्मीदवार नीरज कुमार को अपने आधार मत को बचाने की गम्भीर चुनौती होगी.

वैसे पटना स्नातक क्षेत्र के चुनावी इतिहास पर नज़र डालें तो अपवाद छोड़ अधिकांशतः भूमिहार जाति का ही कब्जा रहा है. सीपीआई के रमेश कुमार सिंह लगातार चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

इधर नीरज कुमार (Neeraj Kumar) Patna Graduate Constituency से लगातार तीन चुनावों से इस सीट पर कब्जा जमाये हुए है. वैसे नीरज को मंत्री और सत्ताधारी दल का होने का फायदा तो मिल ही सकता है. मगर जमी पर चुनौतियां कम नही होंगी. दूरी तरफ नीज के खिलाफ एंटि एंकोम्बेंसी की चुनौती भी होगी. दूसरी तरफ मोकामा विधायक अनंत सिंह भी उनकी राह में कांटे तो बिछायेंगे ही। आप को याद होगा कि 2015 के विधान सभा चुनाव में अनंत सिंह के खिलाफ जदयू ने नीरज कुमार को मैदान में उतारा था. इस दौरान नीरज और अनंत सिंह की राजनीतिक तल्खियां निजी स्तर पर पहुंच गयी थीं. ऐसे में अनंत सिंह के करीबियों का कहना है कि वह किसी भी हाल में नीरज को हराने की हर संभव कोशिश करेंगे.

हालांकि चुनाव फिलहाल टल गया है नीरज का कार्यकाल 6 मई तक है तब भी मंत्री तो रहेंगे ही। जो भी उम्मीदवार हैं वो अपने अपने तर्क पेश कर जीत के दावे कर रहे है.

नीरज का कहना है कि वे अपने कर्म के बल पर चुनाव मैदान में उतरेंगे अपने स्नातक साथियों और एनडीए के विशाल कार्यकर्ताओ के सहारे आसानी से जीत हासिल करेंगे चुनाव में कठिन चुनौतियां तो होती ही है पर उसका मुकाबला डटकर करेंगे.

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